खाद्य तेल की कीमतों में पिछले चार-पांच दिन से फिर से तेजी आ गई है। पिछले चार माह में खाद्य तेलों के भाव में नरमी आने से अन्य सामग्रियों की कीमतों में कमी आने से महंगाई से राहत मिली थी। सरसों के तेल के दाम 30 से 35 रुपये प्रति लीटर घटे थे, रिफाइंड में 35 से 40 रुपये की कमी आई थी।
कारोबारी नीरज गुप्ता के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आवक के आधार पर मूल्य भी उसी अनुसार तय होता है। सरकार ने महंगाई को काबू में करने के लिए पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल पर लगने वाले सीमा शुल्क में कटौती शून्य कर दी है। इस छूट को सरकार लगातार आगे बढ़ाती जा रही है।
सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को सस्ते खाद्य तेल के रूप में मिल रहा था, इससे खाद्य तेलों की कीमतों में कमी आई थी। उन्होंने बताया कि वायदा कारोबार का बंद होना भी भाव में नरमी का प्रमुख कारण रहा है। अब त्योहारी सीजन में मांग अधिक होने और आवक कम हो जाने से कीमतों में बढ़ोत्तरी हो गई है।
कारोबारी अतुल गुप्ता ने बताया कि पहले सरसों का तेल 130-140 रुपये प्रति लीटर था, जो अब 155-160 रुपये प्रति लीटर हो गया है। सोयाबीन रिफाइंड 130-135 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा था, जो अब 145-150 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह पाम ऑयल 120- 125 रुपये प्रति लीटर का भाव था, जो अब 130-145 रुपये प्रति लीटर हो गया है। उन्होंने बताया कि त्योहारों के बाद शादियों का सीजन होने से खाद्य तेलों की कीमतों में कमी होने के आसार नहीं दिख रहे हैं।