अमर उजाला समृद्धि संवाद के तीसरे चरण में शुक्रवार को तालानगरी में एक बार फिर शहर के कई प्रतिष्ठित व्यापारी, सीए, आर्थिक जानकार और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी एक मेज पर आए। सभी ने कहा कि नगद का प्रवाह कुछ कम हुआ तो ई ट्रांजेक्शन बढ़ा। व्यापारियों ने कहा कि जेब में नगद होने पर अनावश्यक खर्च ज्यादा होता है इसलिए अब कार्ड और ई पेमेंट ज्यादा पसंद किया जा रहा है।
ई पेमेंट पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी लोगों को इस ओर मोड़ रही है। केंद्र सरकार भी इसको घर घर तक हरेक जेब में पहुंचाना चाहती है। इसके अलावा शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से ऑटो सेक्टर को दी गई राहत। इसके बाद शेयर बाजार में आई तेजी भी संवाद के केंद्र में रही। जिससे व्यापारी, बैंकर्स और आर्थिक जानकार उत्साहित दिखे। सभी ने कहा कि श्राद्ध पक्ष के सम्पन्न होते ही बाजार में रौनक और बढ़ेगी, जो सहालग के महीनों में भी जारी रहेगी। दीपावली के ऑफर भी लोगों को इंतजार करने पर मजबूर कर रहे हैं। इस बीच आने वाले आनलाइन शॉपिंग के ऑफर भी लोगों की नजर में बने हुए है। ये सभी मिल कर पूरी अर्थव्यवस्था को एक बड़ी डोज देंगे। जिससे ऊपर से नीचे तक नगदी का प्रवाह और बढ़ेगा।
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केंद्र सरकार की योजना हो या राज्य सरकार की हो। दोनों तरह की योजनाओं में समय से काम शुरू हो और समय से भुगतान हो तो बाजार में नगदी का प्रवाह बना रहता है। पिछले कुछ महीनों में इन पैसों का भुगतान रुकने से कुछ असर हुआ है। अगर सरकार रुके हुए भुगतान कर दे तो प्रवाह बन जाएगा। केवल एक वर्ग को छूट देने से बड़ी राहत नहीं मिल सकती है। सभी वर्गों को एक सामान राहत मिले। कुछ महीनों में बाजार में सुधार दिखेगा, ये सतत प्रक्रिया है।
-अनमोल वार्ष्णेय, कोर्णाक इरीगेशन।
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सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई सख्ती। ज्यादातर टैक्स के काम आनलाइन होने। रियल एस्टेट से लेकर एक छोटी सी छोटी चीज पर पारदर्शिता आने से बाजार में सुधार समय चल रहा है। जल्द ही त्योहारी सीजन के शुरू होते ही ये स्थितियां बदलेंगी। इस वक्त लोग सिर्फ अपनी जरूरत के काम कर रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में लगने वाला सुविधा शुल्क आनलाइन प्रक्रिया ने कम किया है इसलिए बाबुओं की आय कम हुई है जिसका असर बाजार पर है।
-अरुण अग्रवाल, स्वदेशी शो रूम रेलवे रोड।
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कार चलाते वक्त गियर बदलते हुए कुछ स्पीड कम करनी पड़ती है। ठीक इसी तरह से अर्थव्यवस्था में सुधार के वक्त कुछ झटके लगते रहते हैं। बाजार में धीरे धीरे मांग बढ़ रही है। त्योहारी सीजन में ये और बढ़ जाएगी। जीएसटी, आनलाइन बिलिंग, आनलाइन मार्केट ने काफी कुछ नंबर एक में कर दिया है। अब ये नंबर एक का काम छोटे दुकानदार तक पहुंच रहा है। इसी से अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। इसमें थोड़ा वक्त और लगेगा। बरसात के बाद आमतौर पर कुछ कमी रहती है।
-अंकित गोयल, एलाइड इंडिया।
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पहले हम सभी लोग थोक में चीनी, तिल, रिफाइंड, देशी घी आदि सामान खरीदते थे। जिसका बाद में भुगतान होता रहता था। अब ये ट्रेंड नहीं है। अब हम हफ्ते की जरूरत के अनुसार सामान मंगाते है। उसी के अनुसार टैक्स देते हैं। इसके बाद सामान बना कर बाजार में सप्लाई करते हैं। अब ये सब कुछ और पारदर्शी हो रहा है। जिससे बाजार में मांग और आपूर्ति का अनुपात औसत है। जब त्योहार आते हैं तो ये बढ़ जाता है। अब अव्यवस्था व्यवस्था की ओर मुड़ रही है।
-राजीव जलाली, जलाली स्वीटस।
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मंदी की कहानी भेड़िया आया भेड़िया आया की तर्ज पर है। जिस तरह से भेड़िया किसी ने नहीं देखा था उसी तरह से मंदी को किसी ने नहीं देखा। बस सब चिल्ला रहे हैं। कैश की जगह ई ट्रांजेक्शन बढ़ने से लोग अब सोच समझ कर खर्च कर रहे हैं। व्यापारी नये कारोबार की ओर बढ़ रहे हैं। तमाम कारोबारी आनलाइन मार्केटिंग से भी जुड़ रहे हैं। चीजें बदल रही है। अब छोटे कारोबारी माल डंप नहीं कर रहे हैं। जितनी जरूरत है उतना मंगा रहे हैं। यही अंतर हुआ है।
-पवन खंडेलवाल, आकांक्षा इंटरनेशनल।
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मैंने खुद आनलाइन ट्रेडिंग की है। जिसमें महसूस हुआ कि मैंने दूसरे दुकानदारों का नुकसान किया। इसके बाद मैं फिर से परंपरागत काम की ओर आया। अब मैं दोनों तरह के काम करता हूं। वर्ष 2009 के बाद पहली बार सेंसेक्स एक दिन में 1700 अंक से अधिक बढ़ा। अब इसका असर पूरे बाजार पर होगा। धीरे धीरे बाजार रफ्तार पकड़ लेगा। हम नये ट्रेंड और नये टैक्स के साथ बाजार में हैं इसलिए कुछ समस्याएं हैं, जो आने वाले वक्त में निसंदेह दूर हो जाएंगी।
विकास जैन, पैक्ट लॉक्स।
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एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसने कार या स्कूटर बेचने के बाद दूसरा न लिया हो। सरकारी विभागों में आनलाइन सिस्टम ने रिश्वतखोरी को कम किया है। बेवजह की महंगाई नहीं है। महंगाई की दर कम हुई है। गुजरे छह साल में म्यूचुअल फंड का बाजार पूरे देश में 10 लाख करोड़ से 25.50 लाख करोड़ रुपये का हो गया है। अब 7.55 लाख तक की आय कर से मुक्त है। देश की 80 फीसदी आबादी इसी दायरे में है। आर्थिक स्थिति एक नंबर में बेहतर हो रही है।
-विजय पचीसिया, डीबी इंटरनेशनल स्टाक ब्रोकर।
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भारतीय मानस में बचपन से ही बचत की आदत डाली जाती है। इसलिए भारतीय अर्थव्यवस्था हमेशा अंदर से मजबूत रहती है। अब सरकार की नीतियों के चलते नंबर दो का काम बंद हो रहा है। लोग नंबर एक की ओर आ रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल अधिकांश लोगों की सेल नंबर एक में दो से तीन गुना हुई है। ये अच्छा संकेत है। आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। जिससे पीएम मोदी का पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का सपना भी साकार होगा।
अरुण कुमार, सीए।
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किसी भी कारोबार की प्रगति का ग्राफ अगर स्थिर हो जाए तो उसे अच्छा नहीं माना जाएगा। ये ग्राफ कभी ऊपर तो कभी नीचे रहता ही है। कमोबेश यही हालात अर्थव्यवस्था की है। ये कभी ऊपर कभी थोड़ा नीचे भी रहेगी। जब नियम कानून बदलते हैं तो कुछ वक्त लगता है। लेकिन मांग और आपूर्ति इससे कभी कम नहीं होती है। वह जरूरत के अनुसार कम ज्यादा होती है। पिछले वर्ष की तुलना में काम बढ़ रहा है, अब वो कागजों में आ रहा है। जिसमें कुछ वक्त लग रहा है। बाकी बाजार उत्साहित है।
-शमशाद अहमद, बैंक ऑफ बड़ौदा, रीजनल डायरेक्टर।
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आज ही अतरौली में एचडीएफसी की नई शाखा खुली है। अगर कहीं मंदी है तो नई शाखा कभी नहीं खुलती। हमारा बैकिंग सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ग्राहक भी बढ़ रहे हैं। लोन का दायरा बढ़ रहा है। बैकिंग का पूरा कारोबार अब हर साल बढ़ रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था एक बड़ी व्यवस्था है, इस पर वैश्विक असर कुछ दिनों के लिए होता है, जो लंबे समय तक नहीं रहता है। हम सब आने वाले कुछ दिनों में बाजार में बेहतरीन कारोबार देखेंगे। ये बात तय है।
-रविंद्र प्रसाद, लीड बैंक मैनेजर।
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रियल एस्टेट में पारदर्शिता आने और नंबर दो का निवेश रुकने से कुछ कमी उसी सेक्टर में आई। जिसका असर रहा। अब वो कमी दूर हो रही है। नई पीढ़ी टैक्स अदा करने में रुचि दिखा रही है। ग्राहक अब ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। सब कुछ मोबाइल पर उपलब्ध है। अब धोखाधड़ी रुक रही है। इसका सकारात्मक असर बाजार पर है लेकिन वह नवरात्रि से दीपावली के बाद तक दिखेगा। भारत जल्द ही एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा। जिसको पूरी दुनिया देखेगी। हम और आप भी ।
-बीएस चौहान, बैंक ऑफ बड़ौदा।
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नोटबंदी, जीएसटी और नियमों में हुए बदलाव की जानकारी लोगों को देर से हुई। जिसकी वजह से कुछ असर रहा। अब वो सभी चीजें आम आदमी के समझ में आ गई हैं। लोग मोबाइल से ही कारोबारी काम निपटा रहे है। चीजें बदली हैं जिससे लोगों को राहत भी मिली है। बैकिंग भी मोबाइल पर हो रही है। इन सभी नये बदलावों के साथ अब नंबर एक का काम तेजी से आगे बढ़ा है। जिससे आने वाले वक्त में पूरी अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर दिखेगा।
-अंबरीश श्रीवास्तव, एचडीएफसी बैंक।
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शहर और ग्रामीण इलाकों के कारोबार में अंतर है। अभी ग्रामीण एक नंबर के कारोबार में आने से हिचक रहे हैं, लेकिन नई पीढ़ी धीरे धीरे इसको स्वीकार कर रही है। असंगठित क्षेत्र के काम संगठित क्षेत्र में आने से कुछ असर देखने को मिल रहा है, लेकिन मांग और आपूर्ति या कारोबार में कोई फर्क नहीं पड़ा है। हमारी शाखाओं में होम लोन, कार लोन, नये खाते सहित तमाम बैंकिंग सेवाएं लगातार बढ़ रही है। इनमें कोई कमी नहीं आई है। अभी ये कारोबार और आगे बढ़ेगा।
-कुमार अरविंद, कैनरा बैंक।
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श्राद्धपक्ष के सीजन में हर साल मांग कुछ कम रहती है। इसके बाद फरवरी तक लगातार बाजार बेहतरीन रहता है। हमारे बैंक में इन दिनों हर तरह के लोन की मांग है। नये ग्राहक तेजी से बढ़ रहे हैं। अब लोग कम अवधि के लोन भी मांग रहे हैं। जिसको मुहैया कराया जा रहा है। त्योहारी सीजन में ऑफर का इंतजार कर रहे ग्राहक अब खरीददारी करने निकल रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हर जगह बैंकिग का बढ़ता दायरा ही हमारे विकास का सबसे बड़ा पैमाना है।
-अल्पिता, कैनरा बैंक।
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ऑटो सेक्टर में बीएस-6 लाने की तैयारी शुरू होने से बीएस-4 प्रदूषण के मानक के वाहनों की मांग यकायक ठहर सी गई। जब सरकार ने बीएस-4 को भी आगे जारी रखने का निर्णय लिया तो मांग पूर्ववत हो गई। अब इलेक्ट्रानिक कारों का इंतजार है। बैंकों में घर, दुकान, कारोबार, कार सहित अन्य वाहनों के लोन के आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं। इसमें कोई कमी नहीं है। बैंकिंग सेक्टर में कामकाज पूर्ववत होने लगा है। श्राद्ध पक्ष में कुछ कमी हर साल ही रहती है। ये नई बात नहीं है।
-सुनील कुमार, एचडीएफसी।
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भारत कभी कमजोर नहीं रहा। इसका कारण ये है कि हम जितना खर्च करते हैं उससे 25 फीसदी तक बचत भी करते हैं। बाकी हम सब देख रहे हैं कि रोज नई दुकानें खुल रही हैं। नये शोरूम खुल रहे हैं। हर गली में आनलाइन बुकिंग के डिलीवरी ब्वाय दिख रहे हैं। ऐसे में ये कहना कि मंदी है। ये बिल्कुल गलत है। ये सही नहीं है। बस इतना जरूर है कि कारोबार का सिस्टम बदल रहा है। लोगों के भुगतान करने की आदतें बदल रही है। इसलिए कुछ परेशानी महसूस हो रही है। त्योहारों में चीजें और बेहतर होंगी।
-डा. नीता वार्ष्णेय, होम साइंस शिक्षिका, टीकाराम महाविद्यालय।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन अमेरिका की व्यापारिक प्रतिद्वंदता वैश्विक स्तर पर आई मांग की कमी की जिम्मेदार है। जिसका आंशिक असर कुछ वक्त के लिए भारत पर हुआ है लेकिन केंद्र सरकार के सतत प्रयासों से इसको दूर किया जा रहा है। लगातार सरकार बाजार को संजीवनी दे रही है। नौकरीपेशा के जीवन पर असर नहीं हुआ है। कुछ सेक्टर पर असर हुआ था अब वो भी इससे निकल रहे हैं। त्योहारी सीजन में ये सब कुछ बेहतर हो जाएगा। अब कुछ दिनों में बाजार अपनी रफ्तार पकड़ेगा।
-संजीव कुमार वार्ष्णेय, अर्थशास्त्र विभाग राजकीय महाविद्यालय अतरौली।
अमर उजाला समृद्धि संवाद कार्यक्रम में उपस्थित व्यापारी, शिक्षक व बैंक कर्मचारी।- फोटो : CITY OFFICE