नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी को लेकर देशभर में अफ वाह फैली है कि मुसलमानों के कागज देखें जाएंगे और न दिखा पाने पर उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। अफ वाह के इस गर्म माहौल में हो रही सातवीं आर्थिक गणना में लगे प्रगणकों को मुस्लिम इलाकों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग गलतफहमी के चलते प्रगणकों को सही और पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं। आलम यह है कि मुस्लिम इलाकों में लोग प्रगणकों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। इस समस्या को लेकर प्रगणकों द्वारा जिलाधिकारी से की गई शिकायत के बाद अब प्रशासन ने इन इलाकों में मुुस्लिम प्रगणकों को ही गणना की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। मगर, राजस्थान के कोटा में एक मुस्लिम महिला प्रगणक के साथ हुई बदसलूकी की घटना के बाद मुुस्लिम प्रगणक भी अपनी ड्यूटी इन इलाकों से हटवाने के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं। फिलहाल, जिले के सभी मुस्लिम इलाकों में आर्थिक गणना का काम ठप पड़ा है।
आर्थिक गणना एक नजर में
- जिले में 09 जनवरी से शुरू हुई थी गणना।
- पहली बार एप के माध्यम से हो रही है गणना।
- 3500 प्रागणकों को लगाया गया है इस कार्य में।
- 30 हजार परिवारों का सर्वे कार्य हुआ पूरा।
- मार्च तक पूरी करनी है आर्थिक गणना।
इन बिंदुओं पर मांगी जा रही है जानकारी
- परिवार के मुखिया सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित पूर्ण जानकारी।
- मकान किराए का है या खुद का।
- परिवार में कितने कामकाजी लोग हैं।
- आजीविका के साधन क्या-क्या हैं।
- परिवार की वार्षिक आय कितनी है।
- परिवार का खुद का उद्यम है या सदस्य नौकरीपेशा हैं या मजदूर हैं।
मुस्लिम इलाकों में फिलहाल आर्थिक गणना का काम बंद है। जल्द ही इन इलाकों में मुुस्लिम प्रगणकों को तैनात कर उन्हें सर्वे की जिम्मेदारी देकर काम को सुचारु कराया जाएगा।
- विष्णुकांत, जिला प्रभारी कामन सर्विस सेंटर।
आर्थिक गणना कार्यक्रम के तहत फिलहाल, मकानों में नंबर डालने का काम किया जा रहा है। मुस्लिम इलाकों में भी नंबर डालने का काम जल्द शुरू करा दिया जाएगा। वहां पर मुस्लिम प्रगणक तैनात किए जाएंगे।
जिलाधिकारी