एग्जीक्यूटिव काउंसिल, एकेडमिक काउंसिल एवं कोर्ट समेत एएमयू के अन्य ऑथोरिटी का दरवाजा एनआरआई के लिए खोलने की तैयारी चल रही है। आज होने जा रही एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की बैठक के एजेंडे में इस पर विचार किया जाएगा। ईसी का एजेंडा सदस्यों के पास पहुंचने के बाद कैंपस में इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है।
एएमयू एक्ट के स्टेट्यूट्स 41 के अनुसार एनआरआई एएमयू की किसी भी बॉडी का सदस्य नहीं बन सकता। एएमयू प्रशासन एक्ट में संशोधन कर एएमयू के विभिन्न बॉडीज में एनआरआई को पहुंचाने का रास्ता साफ करना चाहती है। इसी उद्देश्य से ईसी के एजेंडे में इसे शामिल किया गया है। एजेंडा ईसी सदस्यों के पास पहुंचने के बाद ही इसको लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। इसी सदस्य डॉ. सैयद जफर महमूद ने तो वीसी को खत लिखकर इससे असहमति भी जता दी है और यह भी आग्रह किया है कि उनके पत्र को ईसी की बैठक में रखा जाए।
कैंपस में दबी जुबान इस बात की चर्चा है कि जब कुलपति का कार्यकाल पूरा होने में दो महीने बचे है तो ऐसे संशोधन की अचानक जरूरत क्यों महसूस की जा रही है। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की बात भी कही जा रही है।
लोग यह भी कह रहे हैं कि दूसरे देशों से जब एनआरआई ईसी या कोर्ट की बैठक में शामिल होने आएंगे तो भारी भरकम खर्च कौन उठाएगा। इंतजामिया पर पहले से ही आरोप लग रहे हैं कि एएमयू एक्ट को दरकिनार कर एनआरआई को ईसी सदस्य बना दिया गया है। इस्लामिक धर्म उपदेशक डॉ. जाकिर नाईक भी एएमयू कोर्ट सदस्य रह चुके है।
उनके भी एनआरआई होने की बात सामने आई थी और यह प्रश्न उठा था कि आखिर जाकिर नाईक का प्रस्तावक एवं अनुमोदक कौन था। ईसी के एजेंडे में अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी के मुद्दे को भी शामिल किया गया है। आरोप है कि वह यूनिवर्सिटी के इंट्रेस्ट के खिलाफ काम कर रहे हैै। एजेंडे में चाय-पानी का मुद्दा शामिल किया गया है, जो चर्चा में है।