शुक्रवार की रात को हरियाणा के रोहतक में आए भूकंप के झटके का कंपन अलीगढ़ तक महसूस किया गया। लेकिन अलीगढ़ पूरी तरह सुरक्षित रहा और भूकंप के प्रति पूरी तरह सुरक्षित है। यह दावा किया है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर अतीक अहमद ने।
प्रोफेसर अतीक अहमद ने बताया की शुक्रवार की रात को जो भूकंप आया है उसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 के आसपास होने की बात कही जा रही है, जिसका असर यहां तक आते-आते शून्य लगभग हो जाता है।
उन्होंने बताया कि अलीगढ़ यमुना और गंगा के बीच की भूमि पर स्थित है। यहां की भूमि पहाड़ी और पथरीली नहीं है। इसलिए यहां पर भूकंप से प्रभावित होने की संभावना सबसे कम है। यहां पर झटके तो अनुभव किए जा सकते हैं, लेकिन तीव्रता के स्तर पर उसकी संभावना बहुत कम ही रह जाती है।
उन्होंने बताया कि 3.4 की तीव्रता के झटके सामान्यता पृथ्वी में कंपन होता रहता है। इससे ऊपर की तीव्रता संवेदनशीलता के स्तर में आती है । अलीगढ़ कभी भी भूकंप के प्रति संवेदनशील भूभाग की स्थिति में नहीं रहा है।
यहां पर कुछ ही दूरी पर नरौरा परमाणु केंद्र भी है और ऐसे परमाणु केंद्रों की स्थापना इस बात को ध्यान में रखकर की जाती है जहां पर भूकंप के झटकों से प्रभावित होने की संभावना बहुत कम हो। क्योंकि अगर भूकंप प्रभावित क्षेत्र में इस तरह के रिएक्टर स्थापित किए जाएं तो भूकंप की स्थिति में दोहरी तबाही हो सकती है।