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अलीगढ़ : प्रयागराज-गाजियाबाद से ज्यादा ई रिक्शा लाइसेंस शुल्क अलीगढ़ में

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अभिषेक शर्मा
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प्रदेश के पुराने नगर निगमों में शामिल प्रयागराज व गाजियाबाद में ई रिक्शा पंजीकरण का शुल्क मात्र 500 रुपये सालाना है। इसके विपरीत महज 25 वर्ष पुराना अलीगढ़ नगर निगम यह शुल्क 800 और 1000 रुपये सालाना वसूलता है। आरटीआई में यह खुलासा होने पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर गरीबों के साथ इस तरह का भेदभाव क्यों? और प्रदेश में पंजीकरण शुल्क में एकरूपता क्यों नहीं हैं। अलीगढ़ में यह स्थिति तब है, जब नगर निगम स्तर से इन्हें न कोई स्थायी पार्किंग स्टैंड दिया गया और न ही इनके स्टॉपेज निर्धारित हैं। बस शहर में चलने मात्र का यह शुल्क वसूला जाता है।
आरटीआई कार्यकर्ता व आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव संजीव कौशिक ने नगर निगम अलीगढ़ से ई रिक्शा पंजीकरण शुल्क के संबंध में जानकारी मांगी थी। इस पर नगर निगम ने 19 मई 2022 को उनको यह जानकारी दी थी। ई रिक्शा पंजीकरण शुल्क के लिए नगर निगम ने एक नोटिफिकेशन जारी किया। बाकी जिलों में शासनादेश के आधार पर पंजीकरण शुल्क की वसूली हो रही है। संजीव कौशिक का कहना है कि प्रयागराज तो यूपी के कबाल टाउन में सबसे पुराना और बड़ा नगर निगम है। इसके बाद गाजियाबाद भी अलीगढ़ से पुराना नगर निगम है। फिर अलीगढ़ में गरीबों से यह अतिरिक्त वसूली क्यों? वे जिले के जनप्रतिनिधियों से भी सवाल करते हैं कि यहां यह नोटिफिकेशन क्यों और कैसे पास होने दिया गया। उन्होंने इसे उन गरीब ई रिक्शा चालकों का उत्पीड़न करार दिया है, जिन पर ई रिक्शा खरीदने तक के रुपये नहीं है। वे किराये पर रिक्शा लेकर चलाते हैं।
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किराये पर ई रिक्शा चला रहे गरीब चालक
नगर निगम में पंजीकरण के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि 2019-20 के बाद से पैडल रिक्शा चलाने वाले अब ई रिक्शा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। नगर क्षेत्र में जैसे पहले पैडल चलित रिक्शा को किराये पर उठाने वाले लोग होते थे। इसी तरह अब ई रिक्शा किराये पर देने का धंधा चल रहा है। इसलिए ये चालक ही पैडल रिक्शा छोड़ ई रिक्शा किराये पर लेकर चलाते हैं। इसका निर्धारित शुल्क ई रिक्शा स्वामी को देना होता है। इसमें बैटरी चार्जिंग का खर्च भी अपनी जेब से भरना पड़ता है।
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सुविधा के नाम पर सिर्फ रूट निर्धारित
पिछले एक वर्ष से ई रिक्शा में जब से इंजन-चेसिस नंबर आने लगे हैं, तब से नगर निगम में उनका पंजीकरण होने के बजाय अब आरटीओ में पंजीकरण होने लगा है, जिनमें इंजन-चेसिस नंबर नहीं होते, उन्हीं का नगर निगम में पंजीकरण होता है। इन्हें आरटीओ व ट्रैफिक पुलिस बस निर्धारित रूट पर चलाने की अनुमति देती है। बाकी नगर निगम स्तर से कोई सुविधा नहीं दी जाती है।
ये हैं पंजीकरण आंकड़े ---
वर्ष 2015-16 में पैडल चलित रिक्शा - 4600
वर्ष 2016-17 में पैडल चलित रिक्शा - 3000
वर्ष 2017-18 में ई रिक्शा - 3109, पैडल चलित रिक्शा - 3100
वर्ष 2018-19 में ई रिक्शा - 3120, पैडल चलित रिक्शा - 2115
वर्ष 2019-20 में ई रिक्शा - 3337, पैडल चलित रिक्शा - 62
वर्ष 2020-21 में ई रिक्शा - 2247, पैडल चलित रिक्शा - 180
वर्ष 2021-22 में ई रिक्शा - 2786
ये भी जानें--
- नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में 12 अगस्त 2016 को ई रिक्शा पंजीकरण शुल्क निर्धारण का प्रस्ताव अनुमोदित, बोर्ड बैठक 30 मार्च 2017 को स्वीकृत।
ये है पंजीकरण शुल्क
- 5 सीटर ई रिक्शा मय चालक वार्षिक शुल्क पंजीकरण 800 रुपये।
- ई रिक्शा भार वाहन वार्षिक शुल्क पंजीकरण 800 रुपये।
- ई रिक्शा चालक लाइसेंस भार वाहन शुल्क 200 रुपये।
- 5 सीटर ई रिक्शा किराये पर देने वाले का पंजीकरण शुल्क 1000 रुपये।
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