अलीगढ़। दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता लाने और मरीजों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापरक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश की सभी रिटेल फार्मेसियों को अपनी सार्वजनिक वेबसाइट बनाकर उस पर लाइसेंस, फार्मासिस्ट और दवाओं के साप्ताहिक स्टॉक का विवरण प्रदर्शित करना होगा। वहीं, अस्पताल परिसरों में संचालित फार्मेसियों को दवाओं की खरीद दर और मरीजों को बेचे जाने वाले मूल्य की जानकारी भी वेबसाइट पर देनी होगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से एक अक्टूबर को जारी निर्देशों के क्रम में अलीगढ़ के जिलाधिकारी कार्यालय ने भी छह अक्टूबर को जिले के सभी फुटकर और थोक दवा विक्रेताओं को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। औषधि निरीक्षक दीपक लोधी की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि निर्देशों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आदेश के मुताबिक, प्रत्येक रिटेल फार्मेसी की वेबसाइट पर फर्म का नाम, औषधि लाइसेंस संख्या, लाइसेंस धारक का नाम और दुकान का पता दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही नियुक्त फार्मासिस्ट का नाम, पंजीकरण संख्या और फोटो भी प्रदर्शित करना होगा। दवाओं के स्टॉक का विवरण साप्ताहिक रूप से देना होगा और वेबसाइट पर उपलब्ध सभी जानकारियों को नियमित रूप से अपडेट करना होगा।
अस्पतालों की फार्मेसियों को बतानी होगी खरीद और बिक्री दर
शासन के निर्देश में अस्पताल परिसर में संचालित उन फार्मेसियों पर विशेष जोर दिया गया है, जहां भर्ती मरीजों के पास दवाएं और मेडिकल डिवाइस खरीदने के लिए व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं होते। ऐसी फार्मेसियों को वेबसाइट पर निर्माता का नाम, दवा के ब्रांड का नाम, जेनेरिक नाम, अस्पताल द्वारा दवा खरीदने की दर (पीटीआर) और मरीज को बेचने की दर (पीटीसी) प्रदर्शित करनी होगी। इससे मरीजों को पता चल सकेगा कि अस्पताल किस कीमत पर दवा खरीद रहा है और किस दर पर उन्हें उपलब्ध करा रहा है।
छूट का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंचने पर उठे सवाल
आदेश में कहा गया है कि विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें दवा निर्माता, विपणनकर्ता और स्टॉकिस्ट अस्पतालों की फार्मेसियों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से काफी कम दर पर दवाएं उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन छूट का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच रहा था। कुछ दवाओं की एमआरपी और खरीद मूल्य के बीच काफी अंतर भी पाया गया। विभाग ने दवाओं की खरीद और बिक्री दरों में अत्यधिक अंतर को नकली या मिलावटी दवाओं की आशंका से भी जोड़ा है।
निर्देशों के अनुसार, सभी फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट का यूआरएल काउंटर पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इसके अलावा ऐप या क्यूआर कोड के माध्यम से भी ग्राहकों को यह जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
औषधि निरीक्षा के दीपक कुमार लोधी ने बताया कि यह दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने का आदेश नहीं, बल्कि जनहित में फार्मेसियों की ओर से जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों के हितों की रक्षा करना है।