लोकसभा चुनावों का हर ओर शोर है, हर राजनीतिक दल दावों-वायदों की बौछार कर रहा है। मगर, रुहेलखंड परिक्षेत्र का गन्ना किसान इन वायदों की बौछार में ‘सूखा’ खड़ा है। सरकार की लापरवाही और प्रशासन की मेहरबानी से अलीगढ़ के 45 हजार किसानों का 29 करोड़ 24 लाख रुपया चीनी मिल मालिकों की तिजोरी में रखा है। जनपद के किसान बर्बादी की कगार पर खड़े हैं।
70 ते दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथों रखी आधारशिला पर बनी दि किसान सहकारी चीनी मिल साथा भी बंद होने की कगार पर है। यह आलम तब है जब जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश राणा के कंधों पर ही गन्ना राज्यमंत्री का प्रभार है। मगर, जनपद के विकास की बात तो छोड़ों वह किसानों तक का भला नहीं कर सके हैं।
हर साल गन्ने का रकबा कम हो रहा है। 2006-07 में स्थापित आनंद एग्रो मिल 2013 में किसानों का 42 कारोड़ रुपया लेकर फरार हो गई। इसके बाद हाईकोर्ट की शरण में जाने के बाद भी किसानों को छह साल में पूरा भुगतान नहीं कर सकी है। 14 करोड़ रुपया अभी भी किसानों का बकाया है। वहीं, साथा चीनी मिल पर 15 करोड़ 24 लाख रुपया बकाया है।
दो मुख्यमंत्री और तीन मंत्री फिर भी हाल बेहाल
पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह दोनों ही इस क्षेत्र से रहे। यही नहीं इस क्षेत्र से विधायक रह चुके स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह चौहान, जयवीर सिंह और दलवीर सिंह तीनों मंत्री रह चुके हैं। दलवीर सिंह के पास तो गन्ना विकास और चीनी मिल मंत्रालय भी रहा। वर्तमान प्रदेश सरकार में विधायक हैं। मगर, गन्ना किसान अपनी बदहाली पर आंसू बहाने पर मजबूर हैं।
किसान बदहाल है, लेकिन प्रशासन और सरकार मस्त है। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने चीनी मिलो को निर्देश दिया था कि गन्ना किसानों का 14 दिन के भीतर भुगतान किया जाए। मगर, प्रशासन की मिलीभगत से मिल मालिक किसानों को छह-छह महीने तक चक्कर लगवा रहे हैं। इधर, सरकार भी निर्देश देकर उसकी वास्तविक स्थिति को पता नहीं कर रही है। इन सबके बीच गन्ना किसान फंसा हुआ है। वह अब भी 14 दिन में भुगतान की आस लगाए बैठा है।
चीनी मिल खुलें तो बने बात
आनंद एग्रो के बंद होने के बाद जनपद में एकमात्र साथा चीनी मिल ही है। इसमें प्रतिदिन 12500 कुंतल गन्ने की पेराई हो रही है। जबकि उत्पादन के अनुसार 25 हजार कुंतल गन्ना प्रतिदिन पेराई की क्षमता वाली मिल चाहिए। किसानों की मांग है कि जनपद में या तो नई चीनी मिल स्थापित हो या फिर साथा चीनी मिल की तकनीक में इजाफा किया जाए।
हर साल घटते रकबे
वर्ष रकबा
2012-13 13756
2013-14 17697
2014-15 12890
2015-16 10735
2016-17 10941
2017-18 11920
2018-19 8898
किसानों की आंखों में गुस्सा दिल में टीस
साथा चीनी मिल की मशीनें खराब हो गई हैं। हर दूसरे सप्ताह मिल बंद हो जाती है। इसका उद्धार होना चाहिए। सरकार किसानों के बकाए का भी भुगतान करे, जिससे आर्थिक स्थिति सुधरे।
- संतोष कुमार, गन्ना किसान, धनीपुर
साथा चीनी मिल की मशीनें खराब हो गई हैं। हर दूसरे सप्ताह मिल बंद हो जाती है। इसका उद्धार होना चाहिए। सरकार किसानों के बकाए का भी भुगतान करे, जिससे आर्थिक स्थिति सुधरे।
- संतोष कुमार, गन्ना किसान, धनीपुर