डॉ. राही मासूम रजा
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लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत के संवाद लिखने वाले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र और शिक्षक रहे प्रसिद्ध साहित्यकार व लेखक डॉ. राही मासूम रजा ने पहली बार ऑफर ठुकरा दिया था। बाद में डॉ. राही मासूम रजा ने स्वयं ही महाभारत के संवाद लिखने की पहल की। 15 मार्च को उनकी पुण्यतिथि पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए।
डॉ. राहत अबरार ने बताया कि जब महाभारत धारावाहिक के निर्माता बीआर चोपड़ा ने डॉ. राही मासूम रजा से संवाद लिखवाने का फैसला किया तो यह बात अखबार की सुर्खियां बन गई। बीआर चोपड़ा के ऑफिस में कुछ चिट्ठियां पहुंचीं, जिसमें लिखा था कि क्या आपको कोई हिंदू लेखक नहीं मिला? इसके बाद बीआर चोपड़ा ने वह चिट्ठियां डॉ. राही मासूम रजा को भिजवा दीं। संवाद लेखन से पहले मना कर चुके डॉ. राही मासूम रजा पर इसका गहरा असर हुआ है। उन्होंने ने ठान लिया कि महाभारत के संवाद अब वह ही लिखेंगे, क्योंकि उनसे बेहतर भारत की संस्कृति और यहां की परंपराओं को कौन समझ सकता है।
डॉ. राहत अबरार ने बताया कि मासूम रजा उन साहित्यकारों में से हैं, जिन्होंने सिनेमा में साहित्य की खनक को बरकरार रखा। मूल रूप से गाजीपुर के रहने वाले राही मासूम रजा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए आए थे, बाद में यहां पर अध्यापन का कार्य भी किया। वह शमशाद मार्केट स्थित जिस बिल्डिंग में रहते थे, उस कमरे के आगे उनके नाम की प्लेट अभी भी लगी हुई है। डॉ. राही मासूम रजा मुंबई में रहते हुए कभी अलीगढ़ को नहीं भूल पाए। यही कारण था कि उन्हें जब भी लेखन के संबंध में अपने सृजन को नया आयाम देना होता था, तब वह अलीगढ़ की ओर रुख कर लिया करते थे। उनके अलीगढ़ प्रवास के दौरान यहां पर साहित्यकारों और लेखकों की लंबी बैठक चला करती थी। 15 मार्च 1992 को उनका निधन हो गया था।