डॉ. कफील खान
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भड़काऊ भाषण देने के बाद रासुका में निरुद्ध किए गए मथुरा जेल में बंद डॉ. कफील के अधिवक्ता ने जवाब तैयार कर दिया है, जिसे उनकी सहमति व अध्ययन के लिए मथुरा कारागार भेजा गया है। वहां से डॉ. कफील की सहमति मिलने के बाद इसे जिला मजिस्ट्रेट के यहां दाखिल किया जाएगा।
डॉ. कफील के अधिवक्ता इरफान गाजी के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट द्वारा कफील को रासुका में पाबंद करते हुए 12 दिन में जवाब दाखिल करने को कहा है। इस नोटिस का बिंदुवार जवाब तैयार किया गया है। अब तक जो बात समझ में आई है, उसके अनुसार प्रशासन का मानना है कि 12 दिसंबर को एएमयू में कफील के भाषण के बाद 13 दिसंबर को 10 हजार छात्र एकत्रित हुए और फिर 15 को हिसंक हुए।
वहीं उसके बाद से धरना भी अनवरत जारी है। अधिवक्ता के अनुसार इस मामले में कफील का कहना है कि एएमयू में 9 दिसंबर से ही विरोध व धरना शुरू हो गया था। वह तो 12 को आए थे। उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया, जिससे छात्र भड़के हों। विरोध के क्रम में ही 13 को जुमे के चलते छात्र एकत्रित हुए।
15 को जामिया की घटना का रिएक्शन हुआ। ऐसे में नागरिकता संशोधन कानून व सीएए के विरोध में एएमयू व अलीगढ़ शहर में अब तक हुए पूरे घटनाक्रम के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना गलत है। इरफान गाजी के अनुसार कफील के पास जवाब पर सहमति लेने के लिए भेजा गया है। उसे एक-दो दिन में दाखिल कर दिया जाएगा।