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सिविल लाइन क्षेत्र में मिला डबल म्यूटेशन वैरिएंट

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कोरोना महामारी से जूझ रहे जिले के लिए यह राहत भरी खबर है कि सिविल लाइन क्षेत्र में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन सक्रिय नहीं है। एएमयू शिक्षकों की लगातार हो रही मौतों के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायोलॉजी लैब ने जांच के लिए नमूने सीएसआईआर को भेजे थे।
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इन नमूनों की जांच रिपोर्ट शनिवार को आ गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक, जो नमूने भेजे गए थे, उसमें 90 फीसदी उस किस्म के वायरस थे, जो अक्तूबर 2020 में महाराष्ट्र में पाए गए थे। इसे डबल म्यूटेशन वैरिएंट कहा जाता है। इसके अलावा यूके और इटली में महामारी के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस का भी स्ट्रेन मिला है।
एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने एएमयू और आसपास के सिविल लाइंस क्षेत्र में कोविड-19 के उपभेदों की जांच करने की पहल की थी, जिससे कोविड के उच्च संक्रामक दर के संभावित कारकों का पता लगाया जा सके। इसके बाद वायरल माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने जीनोम अनुक्रमण के लिए सीएसआईआर (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली) को कोविड के 20 नमूने भेजे गए थे।
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माइक्रो बायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी, एएमयू के प्रमुख अन्वेषक, प्रोफेसर हारिस मंजूर खान के अनुसार, भेजे गए 20 नमूनों में से 18 (90 फीसदी) में बी.1.617.2 था] जिसे डबल म्यूटेशन वैरिएंट कहा जाता है। इसका पता पहली बार 5 अक्तूबर, 2020 को महाराष्ट्र में चला था।
प्रोफेसर हारिस मंजूर खान के अनुसार, यह बी.1.617 प्रकार का एक उप प्रकार है, जो उत्तर प्रदेश में कोविड-19 की दूसरी लहर में फैलने वाला मुख्य वायरस है। बी.1.617 वैरिएंट, जिसे भारत की विनाशकारी दूसरी लहर के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार माना जाता है, के तीन उप वंश बी.1.617.1, बी.1.617.2 और बी.1.617.3 हैं।
डब्ल्यूएचओ ने इसकी उच्च संप्रेषणीयता और पहले से मौजूद एंटीबॉडी से कम न्यूट्रलाइजेशन के कारण इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न (वीओसी) कहा है। बी.1.617 में अन्य परिसंचारी रूपों की तुलना में उच्च विकास दर है, जो संचरण की संभावित वृद्धि दर की ओर इशारा करती है। डब्ल्यूएचओ ने इसे भारतीय संस्करण नहीं कहा है और इसके लिए वैज्ञानिक शब्द का उपयोग करने के लिए कहा है।
यूके और इटली में महामारी के लिए जिम्मेदार वायरस का स्ट्रेन मिला
जेएन मेडिकल कॉलेज द्वारा जो नमूने भेजे गए थे, उनमें से दो नमूनों में उस किस्म के वायरस पाए गए, जो पहली बार यूनाइटेड किंगडम और इटली में पाए गए थे। प्रोफेसर हारिस के अनुसार एक नमूने में बी.1.1.7 वंश था, जो सार्स सीओवी-2 की तुलना में 40-80 फीसदी अधिक पारगम्य है और पहली बार यूके में पाया गया था। एक नमूने में बी.1 वंश था, जो 2020 में मुख्य रूप से इटली में महामारी के फैलने के लिए जिम्मेदार था, जो बाद में दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल गया। हालांकि, कोई नया स्ट्रेन नहीं पाया गया।
- विश्वविद्यालय आईसीएमआर के निदेशक, सीएसआईआर (जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी संस्थान, नई दिल्ली) के निदेशक और सभी संबंधित वैज्ञानिकों के प्रति उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता है। - प्रोफेसर एम हारिस खान, अध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, जेएन मेडिकल कॉलेज
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