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दूसरे का कुर्ता पहन अलीगढ़ में प्रचार किया था अटल जी ने

Fri, 17 Aug 2018 01:57 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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ATAL JEE - फोटो : self
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मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना, गैरों को गले न लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना’। इन पंक्तियों को लिखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी दिल से भी ऐसा ही थे। उनका सानिध्य पाने वाले लोग आज भी उनकी जिंदादिली एवं दोस्ताना व्यवहार की तारीफ किये बिना नहीं रहते। अलीगढ़ आगमन के दौरान एक ऐसा ही उदाहरण देखने को भी मिला, जिसे पुराने लोग आज भी याद करते हैं। 
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संघ के पुराने कार्यकर्ता गरुड़ ध्वज उपाध्याय कहते है कि बात शायद 1967 की होगी। विधान सभा चुनाव में ठाकुर इंद्रपाल सिंह यहां से जनसंघ प्रत्याशी थी। उनके चुनाव प्रचार के सिलसिले में अटल विहारी वाजपेयी आए थे। लगातार चुनावी सभा में व्यस्त रहने के कारण अटल जी का कुर्ता गंदा हो गया था। उस समय उनके पास दूसरा कुर्ता नहीं था।

गरुड़ ध्वज उपाध्याय बताते है कि अलीगढ़ प्रभारी कमल लाल गुप्ता विख्यात वकील शिव हरे सिंघल के घर पर रुके थे। उनके पास एक अतिरिक्त कुर्ता था। उन्होंने कमल लाल गुप्ता से कहा कि मेरे पास दूसरा कुर्ता नहीं है। तुम अपना कुर्ता पहनने को दे दो। अटल जी उनका पहनकर चुनाव प्रचार के लिए निकल पड़े। कमल लाल गुप्ता से कहा कि दिल्ली में आकर कुर्ता ले लेना। शहर के ही एक कार्यकर्ता ने साबुन से कुर्ता धोकर उन्हें वापस सौंप दिया था।
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10 बार अलीगढ़ आए थे अटल
 अटल जी करीब 10 बार अलीगढ़ आए हैं। एक बार एमएलसी नेम सिंह चौहान के घर पर रुके थे। वर्ष 2004 में अटल जी वाजपेयी नुमाइश मैदान में भाजपा प्रत्याशी शीला गौतम के चुनाव प्रचार के सिलसिले में आए थे। उस समय वह प्रधानमंत्री भी थे। विमान में गड़बड़ी के कारण अटल जी करीब दो घंटे विलंब से पहुंचे थे। भाजपा नेताओं का कहना है कि 2004 के बाद वे अलीगढ़ नहीं आए। 1999 में भी उन्होंने नुमाइश मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किया था। उस समय भी शीला गौतम भाजपा प्रत्याशी थीं। नगर विधायक संजीव राजा कहते है कि 1984 में अटल छर्रा में एक सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। उनके साथ राजमाता विजय राजे सिंधिया भी थी। कार से वे लोग छर्रा जा रहे थे। उस समय एसवी कॉलेज के पास ओवर ब्रिज नहीं बना था। रेलवे क्रासिंग बंद होने के कारण अटल जी को काफी देर वहां रुकना पड़ा था। उन्होंने अपने अंदाज में चुटकी ली थी कि सरकार नहीं चाहती कि वह सभा करने जाए। इसलिए रेलवे क्रासिंग बंद करवा दी है।    
 
अटल के बाद गांधी पार्क में नहीं हुई किसी की सभा
भारत रत्न अटल विहारी वाजपेयी ने कंपनी बाग स्थित गांधी पार्क में 1996 में सभा को संबोधित किया था। उसके बाद से आज तक गांधी पार्क में किसी नेता की सभा नहीं हुई। वर्ष 1996 में लोकसभा चुनाव के पहले गांधी पार्क में पार्टी की ओर से सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में संचालन भाजपा के तत्कालीन महानगर अध्यक्ष एवं वर्तमान में शहर विधायक संजीव राजा ने किया था। मई के महीने में सभा हुई थी। भाजपा नेता एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह कहते है कि उस समय वे परिषद कार्यकर्ता थे। अटल जी को सुनने के लिए लोग उमड़ पड़े थे। उतनी बड़ी सभा उस समय तक उन्होंने नहीं देखी थी। उसके बाद से आज तक गांधी पार्क में दूसरी सभा नहीं हुई। शहर विधायक संजीव राजा कहते है कि अटल जी को सुनने के लिए दूर-दूर से लोग आए थे।  
 
काली दाढ़ी बहुत पीछे हो, आगे आओ 
 अटल जी 1996 में जब 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने तो उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष ठाकुर रघुराज सिंह भी बधाई देने के लिए उनके आवास पर गए थे और लाइन में लगे हुए थे। उस समय रघुराज भाजपा का प्रदेश संगठन मंत्री ब्रज एवं पश्चिमी क्षेत्र थे। उन पर जब अटल जी की नजर पड़ी तो कहा कि काली दाढ़ी बहुत पीछे हो। जल्दी आगे आ जाओ। दरअसल युवा काल से ही रघुराज सिंह दाढ़ी रखते हैं। वे कहते हैं कि 1996 में विधान सभा चुनाव के दौरान उनकी ड्यूटी अटल जी के साथ लगी थी। करीब एक महीने तक उनके साथ एटा, इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद एवं लखनऊ आदि में चुनाव प्रचार किया। 

यूपी का मामला है, कल्याण से मिलो
भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील पांडेय 1993 में खैर विधानसभा से चुनाव टिकट मांगने अटल जी के पास गए थे। 1992 में वह खैर मंडी समिति का सदस्य रह चुके थे। उन्होंने उनसे पूछा था कि कल्याण सिंह से मिले या नहीं। सुनील पांडेय ने बताया कि मिला था लेकिन वह कह रहे हैं कि खैर से किसी जाट को लड़ाऊंगा। तब अटल जी ने कहा था कि यूपी का मामला है। कल्याण सिंह से ही बात करों। सुनील पांडेय ने बताया कि वह जिंदादिल इंसान थे। एक बार हाथरस में कवि सम्मेलन में आए थे। तब वे लोग खैर से किराये पर वाहन लेकर उनको सुनने गए थे। 

बच्ची को कहानी सुनाया था अटल जी ने
वर्ष 1984 में अटल जी ग्वालियर से लोकसभा चुुनाव लड़े थे और हार गए थे। चुनाव परिणाम के बाद आरएसएस एवं भाजपा कार्यकर्ता गरुड़ध्वज उपाध्याय दिल्ली गए थे। उनके साथ उनके पुत्र एवं पुत्री थे, जो काफी छोेटे थे। बच्चे अटल जी से मुलाकात करना चाहते थे। गरुड़ध्वज उपाध्याय के संगठन मंत्री किशन लाल शर्मा से अच्छे संबंध थे। उन्होंने बच्चों की इच्छा से उन्हें अवगत कराया। उसके बाद अटल जी से मुलाकात हुई। गरुड़ध्वज उपाध्याय कहते हैं कि उनकी बेटी रीमा उस समय मुश्किल से 7-8 साल की रही होगी। अटल जी ने रीमा को कहानी सुनाई। आज रीमा आस्ट्रेलिया में जॉब कर रही हैं। 

एएमयू में बनी थी अटल हिमायत कमेटी 
एएमयू उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर एवं एएमयू के पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार ने बताया कि एएमयू कुलपति महमूद उर रहमान के जमाने में अटल बिहारी वाजपेयी ने जाकिर हुसैन पर लिखित पुस्तक का विमोचन किया था। बाद में महमूद उर रहमान ने अटल हिमायत कमेटी भी बनाई थी। एएमयू के कई शिक्षक इस कमेटी से जुड़े थे।

युवाओं में अटल विहारी वाजपेयी के भाषण का जबर्दस्त क्रेज था। उनका भाषण सुनने सभी जाति एवं धर्म के लोग जाते थे। एक बार कंपनीबाग में उनकी सभा हुई थी। हम लोग भी उनका भाषण सुनने गए थे। वह बहुत अच्छा वक्ता थे।  
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- डॉ. राहत अबरार, डायरेक्टर, एएमयू उर्दू अकादमी 
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