एलमपुर परियोजना में हुए आवास घोटाले के दौरान तैनात रहे अवर अभियंता रतन प्रकाश सक्सेना को उनके मूल विभाग ने ही अपना मानने से इंकार कर दिया। यानि चार साल तक एक फर्जी आदमी यहां जेई रहा और बचकर निकल भी गया। अब तक उस पर कार्रवाई तक नहीं की गई।
दरअसल, डूडा जब भी कोई निर्माण परियोजना पर काम करता है तो वह किसी भी विभाग से जेई को प्रतिनियुक्ति पर बुला लेता है। ऐसा ही 2013 में एलमपुर व जमालपुर माफी की आवास परियोजनाओं में आवास आवंटन के समय हुआ।
उस समय तत्कालीन पीओ जावेद खां ने जेई की डिमांड की तो लैकपेड एटा से जेई रतन प्रकाश सक्सेना संबद्ध होने का आदेश लेकर आ गए। इसके बाद जावेद और रतन सर्वेसर्वा हो गए। इसी बीच निर्माणदायी संस्था जल निगम को रतन पर संदेह हुआ और लैकपेड से उसकी जानकारी मांगी। इस पर लैकपेड के एमडी जेपी पांडेय ने छह जून 2017 को अपने पत्र में कहा कि रतन प्रकाश सक्सेना नाम का कोई भी व्यक्ति अवर अभियंता पद पर कार्यरत नहीं है।
इस पत्र के तीन दिन के अंदर ही शासन के विशेष सचिव एचपी सिंह ने डीएम अलीगढ़ को आदेशित किया था कि रतन को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए। नगरायुक्त ने परियोजना निदेशक की हैसियत से 3 जुलाई 2017 को उसे कार्यमुक्त कर दिया। पीओ जावेद भी कार्यमुक्त हो गए।