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रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी, हमले के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग

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जेएन मेडिकल में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान इमरजेंसी में उपचार न होने पर वापस लौटते राम? - फोटो : CITY OFFICE
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ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ मारपीट कर हाथ तोड़े जाने के विरोध में जेएन मेडिकल कॉलेज में हड़ताल अभी जारी है। इन डॉक्टरों का कहना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी होने तक वे काम नहीं करेंगे। यह फैसला आरडीए की जनरल बॉडी की बैठक में लिया गया।
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शुक्रवार की रात रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पांच पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर रात आठ बजे से हड़ताल वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन शनिवार को सुबह 11 बजे एक बार फिर से जनरल बॉडी की बैठक की गई, जिसमें तय किया गया कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी जब तक नहीं होगी, तब तक रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद दोपहर 12:00 बजे से वह हड़ताल पर चले गए। बृहस्पतिवार सुबह ट्रामा सेंटर में ड्यूटी पर तैनात डॉ. असद के साथ मरीज के तीमारदारों द्वारा मारपीट किए जाने के विरोध में डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे।
आरडीए के सदस्य डॉ. मोहम्मद आकिब फारुकी कहते हैं कि शनिवार को हमने 11:00 बजे जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाई थी। जिसमें हमने एक नई कार्यकारिणी का चयन किया है। इस कार्यकारिणी में स्वयं डॉ. मोहम्मद आकिब फारुकी, डॉ. मोहम्मद दानियाल उस्मानी और डॉ. जुल्करनैन शामिल हैं।
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इसी जनरल बॉडी की मीटिंग में कार्यकारिणी की मौजूदगी में यह फैसला लिया गया कि जब तक हमला करने वाले मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की जाती है, तब तक रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी रहेगी। इस मामले में दो अन्य आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
आरडीए में दो फाड़ हो चुके : विश्वविद्यालय प्रशासन
जेएन मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन में दो फाड़ की स्थिति आ गई है। यह कहना है विश्वविद्यालय के प्राक्टर प्रोफेसर वसीम अली का। वह कहते हैं कि आरडीए के वह पदाधिकारी जिनको वैधानिकता मिली हुई है और कुलपति कार्यालय की स्वीकृति मिली हुई है, उन पदाधिकारियों ने पत्र सौंप कर हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की थी। दूसरी ओर अब कुछ छात्रों ने स्वयं को नई कार्यकारिणी का सदस्य घोषित कर दिया है। इसकी कोई वैधानिकता नहीं है और न ही कुलपति कार्यालय से इसको स्वीकृति मिली है। यह इनका एकपक्षीय फैसला है।
इन्होंने ही हड़ताल जारी रखने की घोषणा कर दी। ऐसा करके उन्होंने अस्पष्ट स्थिति पैदा करने का काम किया है। इसके बाद भी हम मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। शनिवार को ट्रॉमा सेंटर पर मरीजों को भर्ती करने का काम भी हुआ और उनको देखने का काम भी किया गया।
- हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन पुलिस और जिला प्रशासन पर इसके लिए दबाव बनाए। इसके बाद सभी डॉक्टर अपने काम पर लौट आएंगे।
-डॉ. मोहम्मद आकिब फारुकी, कार्यकारिणी सदस्य, आरडीए
हड़ताल के चलते मरीज बेहाल
जेएन मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 250 के आसपास है। इनकी तैनाती ट्रॉमा सेंटर, ओपीडी नंबर चार आदि अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर रहती है। इतनी बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से कामकाज प्रभावित होना स्वाभाविक है। शनिवार को भी मरीज इमरजेंसी के बाहर पड़े हुए देखे गए। इमरजेंसी में अंदर बेड खाली थे। इसके अलावा अन्य आसपास के जिलों से आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों को भी परेशान होते हुए देखा गया।
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