जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी से गंभीर मरीज लौट कर कहां जाएं? यह सवाल यहां से लौटाए जा रहे मरीजों के तीमारदारों को अंदर तक हिलाकर रख देता है। इमरजेंसी के गेट पर मुस्तैद गार्ड पर मरीज की कराह एवं तीमारदारों की गुहार का कोई असर नहीं है। जमीन का भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर भी मौन हैं।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के करीब 450 जूनियर डॉक्टर सातवें वेतनमान को लेकर तीन दिन से हड़ताल पर हैं। दूसरी तरफ 350 से अधिक कंसलटेंट, 80 सीनियर रेजीडेंट, 150 इंटर्न एवं करीब 850 पैरा मेडिकल स्टॉफ होने के बावजूद दूरदराज से आए गंभीर मरीजों को बेदर्दी से लौटाया जा रहा है। रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लाह आजमी स्वयं सवाल उठा रहे हैं कि कंसलटेंट, एसआर एवं इंटर्न की भारी-भरकम फौज इमरजेंसी नहीं चला सकते? अगर मरीज मरता है तो कौन दोषी होगा। एएमयू प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा है। जेएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में एएमयू कर्मी को छोड़कर किसी दूसरे मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है। गम, गुस्सा, आंसू एवं भय लेकर मरीज एवं तीमारदार इमरजेंसी से वापस जा रहे हैं।
इन्हें नहीं मिला उपचार
- करंट लगने से बरौली के आसिफ (28 वर्ष) बुरी तरह घायल हुए थे। छटपटाते आसिफ को लेकर परिजन आए थे। लेकिन बिना उपचार दिए लौटा दिया गया।
- बदायूं के राम निवास खून की उल्टी कर रहे थे। उनके परिजन निजी गाड़ी पर लेकर इमरजेंसी पहुंचे। कोई सुनने वाला नहीं था। मरीज को लेकर वापस चले गए।
जिला अस्पताल वाले भी कम नहीं
जिला मलखान सिंह अस्पताल के डॉक्टर भी कम नहीं हैं। वह जानते हैं कि जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में हड़ताल के कारण मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। बावजूद इसके वहां से मरीजों को जेएनएमसी रेफर किया जा रहा है। इसकी वजह से पहले से ही परेशान गरीब गंभीर मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है। मलखान सिंह से जेएनएमसी आते हैं। वहां से फिर कहीं और जाने को मजबूर होते हैं। बुधवार को कुछ ऐसा ही वाक्या चंडौस के 50 वर्षीय अब्दुल सलाम के साथ हुआ। मलखान सिंह से रेफर होकर आए अब्दुल सलाम की पत्नी नसरीन घंटो गेट पर इलाज कराने के लिए गुहार लगाती रही। कोई सुनने वाला नहीं था। मीडिया कर्मियों के आग्रह पर चिकित्सकों ने इमरजेंसी में ले जाकर मरीज को उपचार दिया।
एएमयू के अधिकारी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं। सातवें वेतनमान से संबंधित लेटर बृहस्पतिवार को यूजीसी में जाने की उम्मीद है। इसलिए हमलोग उम्मीद कर रहे हैं कि कल हड़ताल खत्म हो जाएगी। ओपीडी में हड़ताल का असर नहीं है। इमरजेंसी एवं ऑपरेशन आदि प्रभावित हुए हैं। हमलोग भविष्य में कोशिश करेंगे कि हड़ताल की वजह से इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं हो।
- प्रो. एससी शर्मा, प्रिंसिपल एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जेएनएमसी
जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण परिजन मरीज के वापस ले जाते।- फोटो : CITY OFFICE