देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने लाडलों को भेजने वाले परिवारों में कई ऐसे भी हैं, जिनकी तीन-तीन पीढ़ियां सेना में रहीं। सेना से रिटायर आराम सिंह, उनके तीन बेेटे दरोगा सिंह, पवन सिंह, शिवकुमार भी सेना से रिटायर है। दरोगा सिंह के बेटे कौशल सिंह इस समय सेना में हैं। पवन सिंह ऑपरेशन विजय और पराक्रम, शिवकुमार ऑपरेशन रक्षक और राजेश ऑपरेशन विजय में शामिल रहे थे। योगेंद्र सिंह, गिरेंद्र सिंह, तीन भाई दिगपाल सिंह, सुखवीर सिंह, प्रेमपाल, सूबेदार राजवीर, उनके बेटे शंभू और कैलाश, दो भाई देवेंद्र और गजेंद्र आदि की लंबी फेहरिस्त है। दो युवक वायुसेना और एक नौसेना में है। गांव के दो युवकों हाल ही में सेना में भर्ती हुए हैं।
पुलिस में चयनित हुए हैं गांव के पांच युवक
हाल ही में हुई पुलिस भर्ती में भी गांव के पांच युवकों ऋतिक, सुमित, चंद्रहास, मोनू कुमार और गौरव का चयन कांस्टेबल पद पर हुआ है। गांव के हरेंद्र सिंह यूपी पुलिस में, सतेंद्र सिंह सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर हैं। डॉक्टर देवेंद्र शर्मा के भाई सुरेंद्र शर्मा भी सीआईएसएफ में इंस्पेक्टर हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि उनके गांव में हत्या या अन्य कोई बड़ा अपराध नहीं हुआ है। छोटे-मोटे कोई झगड़े हुए भी तो उन्हें आपस में बैठकर सुलझा लिया गया। जल्लूपुर सिहोर निवासी जगदीश सिंह ने हाल ही में 138 बीघा जमीन खरीदी हैं। वह कहते हैं कि गांव में सभी लोग मिलनसार हैं, यकीन नहीं होता कि यहां का एक व्यक्ति इतना बड़ा जल्लाद भी हो सकता है।
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अच्छे परिवार का लड़का था देवेंद्र, गलत राह पर चल गया। पिता भी सर्विस में थे। गांव में 200 किसान परंपरागत खेती से हटकर चकोरी की खेती कर रहे हैं। देवेंद्र के नाम से गांव की बदनामी हो रही है।-सोनू चौधरी
यहां के सैनिकों ने कई युद्ध और ऑपरेशन में हिस्सा लिया है। मैं स्वयं भी सेना के अभियानों में शामिल रहा हूं। एक व्यक्ति की वजह से गांव के बारे में कोई धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए।-पवन सिंह, ऑनरेरी कैप्टन
मेरे भाई प्रवीण ने देश की सेवा करते हुए जान दी है। उसके बलिदान पर पूरा गांव गर्व करता है। आज पूरे देश में देवेंद्र की वजह से गांव का नाम बदनाम हो रहा है।-इंद्रजीत सिंह, बलिदानी प्रवीण कुमार के भाई।