लॉक डाउन के दौरान बाजार में गुटखे की कालाबाजारी होने की लगातार शिकायतों पर औषधि निरीक्षक पर गाज गिर गई है। साथ ही होम डिलीवरी के लिए अधिकृत किए गए पांच रेस्टोरेंट की रसोई को जांचने-परखने के काम में लापरवाही बरतने पर जिला अभिहित अधिकारी भी कार्रवाई की जद में आ गए हैं। जिलाधिकारी ने इन दोनों से स्पष्टीकरण तलब करते हुए एडीएम सिटी को निलंबन की कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक, जिला अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार और औषधि निरीक्षक धर्मेंद्र चौधरी ने लॉकडाउन की अवधि में खाद्य प्रतिष्ठानों और मेडिकल स्टोर के निरीक्षण नहीं किए। तमाम शिकायतों के बाद भी दोनों अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई, जबकि अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय ने बताया कि जिन रेस्टोरेंट को डोर टू डोर डिलीवरी की अनुमति दी गई है, वह मानक पूर्ण नहीं कर रहे हैं। उनके खाद्य पदार्थों के न तो सैंपल लिए गए है और न ही किसी प्रकार का नोटिस जारी किया गया है। इस पर एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी को निर्देश दिए हैं कि दोनो अधिकारियों का स्पष्टीकरण प्राप्त कर निलंबन की कार्यवाही करें।
झोलाछाप और जर्राह ने खोली दुकान तो नपेंगे अधिकारी
लॉकडाउन के दौरान जर्राह व झोलाछाप डॉक्टरों के संबंध में लगातार क्लीनिक खोलने की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह इन पर छापामार कार्रवाई करें। बिना अनुमति और लॉकडाउन का पालन न करने वाले क्लीनिक व मेडिकल स्टोर्स पर धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही मेडिकल स्टोर्स की चेकिंग के लिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जाए। अगर, किसी के पास एक्सपायरी दवाएं मिलतीं हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। सीएमओ, एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ व डीपीओ 5-5 गांवों का निरीक्षण कर इनमें स्थित मेडिकल स्टोर और क्लीनिकों की निरीक्षण आख्या मुख्य विकास अधिकारी अनुनय झा को सौंपे। इस कार्य में लापरवाही बरती गई तो अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय है।