श्रीराम कथा का वर्णन करते स्वामी रामभद्राचार्य। संवाद
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क्षेत्र के गांव लधौआ स्थित चीनी मिल परिसर में चल रही श्रीराम कथा एवं 108 कुंडीय महायज्ञ के सातवें दिन शनिवार को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि भारत के हर नागरिक को संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए। इसके लिए उनकी संस्था की ओर से ऑनलाइन व ऑफलाइन संस्कृत पढ़ाने की चित्रकूट में व्यवस्था की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत ऋषि मुनियों की धरती है, जहां नारी को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यहां पर दुष्कर्म की जो घटनाएं हो रही हैं, उसके पीछे संस्कृति का अभाव है। भारत की संस्कृति में अपनी पत्नी के अलावा दूसरी महिलाओं को बहन-बेटियों का दर्जा दिया गया है। संस्कृति की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवत्व का वास होता है और वही समाज वास्तविक अर्थों में संस्कारवान बनता है।
स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि वह अखंड आर्यावर्त फाउंडेशन के सहयोग से अलीगढ़ में अपनी 1424 वीं रामकथा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आने वाले समय में पहली अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। यदि भारतीय संस्कृति सुरक्षित नहीं रही तो यह प्रगति अधूरी रहेगी। भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। संस्कृति को सही मायने में समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। बिना संस्कृत के भारत संस्कारवान नहीं बन सकता।
रामभद्राचार्य महाराज ने भरत मिलाप का अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि आज के समाज को भरत के त्याग, प्रेम और मर्यादा से प्रेरणा लेनी चाहिए। पूरा कथा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।