इस दौरान लोक अदालत में कुल 141704 वादों का निस्तारण कर 58 करोड़ 97 हजार 37 रुपये धनराशि तय की गई। जिसमें सभी न्यायालयों में सुलह समझौते के आधार पर 44075 वादों का निस्तारण कर 4 करोड़ 20 लाख 61 हजार 268 रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं बैंक व प्रशासन द्वारा प्री-लिटिगेशन व अन्य माध्यमों से 97146 वादों का निस्तारण कर 279508769 रुपये प्रतिकर राशि तय की गई। वहीं स्थायी लोक अदालत अलीगढ़ द्वारा 29 वाद का निस्तारण कर 6715737 रुपये धनराशि तय की गई। साथ में उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग ने 15 वाद का निस्तारण कर 505942 रुपये की धनराशि तय की गई।
ये रहे मौजूद
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय संजीव फौजदार, उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी, स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष शंकरलाल, सदस्य सत्यदेव उपाध्याय, आरती, एडीजे प्रतिभा सक्सेना, अपर न्यायाधीश परिवार न्यायालय ललिता गुप्ता, ज्ञानेन्द्र सिंह, रचना, एडीजे राकेश वशिष्ठ, संजय कुमार यादव, अभिषेक कुमार बागडिय़ा, पारूल अत्री, रवीश अत्री, नवल किशोर सिंह, प्रदीप कुमार राम, अनिल कुमार, विनय तिवारी, अमित कुमार तिवारी, अंजू राजपूत, सीजेएम शिवम कुमार, रेलवे मजिस्ट्रेट शिवांक सिंह, दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह, सचिव दीपक बंसल, दि सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर कुमार वाष्र्णेय सचिव संजीव कुमार शर्मा, विद्युत अधिवक्ता प्रमोद कुलश्रेष्ठ, परिवार न्यायालय काउंसलर योगेश सारस्वत आदि प्रमुख रूप से रहे।
मुंबई से आकर निपटाया 70 हजार रुपये का मुकदमा
इस लोक अदालत में मुंबई के एक कारोबारी ने खुद पर चल रहे 70 हजार रुपये का मुकदमा भी सुलहनामे के आधार पर निपटाया। यह मुकदमा 2018 में सासनी गेट के हार्डवेयर सप्लायर ने कराया था। जिसमें चेक दिए जाने के बाद भी भुगतान न होने का आरोप था। जिसे इस लोक अदालत में मुंबई से आकर निपटाया गया।