अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से वनस्पति विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर आरपी सिंह ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसा संबोधन दोबारा सुनने के लिए कान तरस गए। उनके संबोधन में गजब का सम्मोहन और ओज था।
अमर उजाला ने जब उनसे डॉ. राधाकृष्णन के बारे में पूछा, तो प्रो. सिंह पल भर के लिए खामोश हो गए। एक लंबी सांस लेते हुए वह बोले, ‘डॉ. राधाकृष्णन का संबोधन जबर्दस्त था। संयोग मुझे भी उनकी मौजूदगी में बीएससी की डिग्री लेने का सौभाग्य मिला। जब वह मंच पर आए, तो पहले पंडाल तालियों से गूंज उठा। उसके बाद जब वह माइक पर आए, तो खामोशी छा गई। करीब 15 मिनट तक अंग्रेजी में धारा प्रवाह बोले। उनके संबोधन की तारीफ हर कोई कर रहा था। वक्त काफी गुजर चुका है। इसलिए पूरा संबोधन तो याद नहीं है, लेकिन उनके संबोधन का एक अंश आज भी याद है, जब कहा था यह कहना आसान है कि हम सब स्वतंत्र हैं, लेकिन उसके योग्य होना उससे ज्यादा मुश्किल है’। प्रो. आरपी सिंह ने कहा कि वह 1963 से लेकर 2018 तक दीक्षांत समारोह के गवाह रहे, लेकिन जो संबोधन 27 फरवरी 1966 को दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने दिया था, वैसा संबोधन कभी सुन पाया। उन्हें करीब से देखने के लिए विद्यार्थियों का हुजूम उमड़ पड़ा। बावजूद इसके अनुशासन तोड़ने के लिए किसी ने दुस्साहस नहीं किया। अब वैसा अनुशासन भी नहीं दिखता।