महानगर के बहुचर्चित बिल्डर और अतरौली विधानसभा से बसपा के पूर्व प्रत्याशी धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड के सभी 15 आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बुधवार को बरी कर दिए गए। अपर सत्र न्यायालय-6 के न्यायाधीश सुरेश चंद्र की अदालत में नौ माह तक चले ट्रायल के बाद यह फैसला सुनाया गया।
हालांकि अभी इस मामले के मुख्य आरोपियों हरेंद्र सिंह व वीरेश सिंह की गैंगस्टर एक्ट में जमानत होना बाकी है। इसलिए उनकी रिहाई में कुछ वक्त लग सकता है। बन्नादेवी के बारहद्वारी चौराहे से चंद कदम पहले 10 जनवरी 2015 की शाम आठ बजे धर्मेंद्र चौधरी निवासी कनक रेजीडेंसी क्वार्सी की उस समय हत्या कर दी गई थी
, जब वह अपनी फार्च्यूनर कार में ड्राइवर संजय निवासी नगला तिकौना संग गली गुल्लूजी जा रहे थे। उस समय हत्याकांड का मुकदमा धर्मेंद्र के पिता चंद्रपाल सिंह ने अज्ञात बाइक सवार हमलावरों पर दर्ज कराया था। मगर एक पखवाड़े की जांच के बाद पुलिस ने मुकदमे में आधा दर्जन शूटरों को गिरफ्तार करते हुए यह खुलासा किया था
कि बिल्डर एसोसिएशन की बैठकों में धर्मेंद्र चौधरी का जिले के दबंग भाइयों हरेंद्र सिंह-वीरेश प्रधान निवासी भरतपुर लोधा से विवाद हुआ। साथ ही एक जमीन को लेकर भी दोनों में मनमुटाव था। इन्हीं दो वजहों से किसी भैयाजी के इशारे पर हरेंद्र सिंह-वीरेश सिंह ने अपने शूटरों की मदद से यह हत्या कराई।