कोरोना मरीजों के बीच रेमडेसिविर की इंजेक्शन की जबरदस्त किल्लत है। कुछ निजी कोविड हास्पिटल अधिकांश मरीजों को इसकी जरूरत बता रहे हैं। हालांकि, सीएमओ और दूसरे अधिकारी इससे सहमत नहीं है। अधिकारियों ने आज स्पष्ट किया कि रेमडेसिविर की जगह डेक्सामेथोसोन व एस्टरॉयड भी दिया जा सकता है।
कोरोना के बढ़ते मरीजों के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत बढ़ती जा रही है। बाजार में इसकी कालाबाजारी हो रही है। ये इंजेक्शन पीड़ितों को उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सीएमओ डा. बीपी कल्याणी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. शाहिद सिद्दीकी और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हारिस खान ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन कोई जादुई दवा नहीं है। हरेक कोरोना मरीज के लिए इसकी जरूरत नहीं है। सिर्फ जो मरीज सामान्य से गंभीर लक्षणों की ओर जाते हैं, उनको ही इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा बाजार में उपलब्ध डेक्सामेथोसोन व एस्टरॉयड इंजेक्शन इसके सुरक्षित और बेहतर विकल्प हैं। इनका उपयोग करने से अच्छा परिणाम प्राप्त होगा।
मंगलवार कलक्ट्रेट में हुई बैठक में सीएमओ डा. बीपी सिंह कल्याणी ने डीएम चंद्रभूषण सिंह को बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों को उचित उपचार दिया जा रहा है। इस पर डीएम ने निर्देश दिए कि मलखान सिंह जिला अस्पताल व दीनदयाल अस्पताल में आक्सीजन की कितनी आवश्यकता है। इसके लिए सीएमओ दोनों अस्पतालों का निरीक्षण कर रिपोर्ट दें। एल-2 दीनदयाल अस्पताल व सभी एल-1 अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था होनी चाहिएं। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।