जिले में पीने के पानी की समस्या वर्षों पुरानी है। महानगर के कटोरे की आकृति में होने के चलते नगर निगम पानी की सप्लाई ऊपरकोट सहित कई इलाकों में नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में लोगों ने अपने घरों में सबमर्सिबल पंप लगवा रखे हैं। इनकी स्रंख्या कई लाख है, जिसके कारण प्रतिदिन लाखों लीटर भूगर्भ जल का दोहन हो रहा है। इसके अलावा, आरओ प्लांट, कार वॉशिंग सेंटर, बर्फखाने तथा नगर निगम के नलकूप भारी मात्रा में जल का दोहन करते हैं। इन्हीं कारणों से नगर निगम डार्क जोन में आ गया है। भूगर्भ जल विशेषज्ञों के अनुसार यदि अति दोहन की स्थिति नहीं सुधरी तो कुछ वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। जिले वासी बूंद - बूंद पानी को तरस सकते हैं।
जल संचयन को लेकर न तो किसी को फिक्र है और न ही कोई सरकारी इंतजाम है। बीते कुछ वर्षों में पौधारोपण व तालाब सुंदरीकरण को लेकर थोड़ा प्रयास जरूर किया गया लेकिन, ये उपाय भी नाकाफी हैं। आलम यह है कि सरकारी दावों के विपरीत न तो सरकारी दफ्तरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिग सिस्टम की स्थापना हुई है और न ही अन्य कोई इंतजाम किए गए हैं। यूं तो पानी का उपयोग साल भर होता है और बरसात भी एक-दो महीनों की ही होती है। इसके बावजूद अच्छी बारिश काफी हद तक भूजल के भंडार को भर देती है। यदि अभी भी वर्षा जल के संग्रहण के उपायों पर गौर नहीं किया गया तो भावी पीढ़ी के लिए भूगर्भ जल सपना ही बनकर रह जाएगा।
यह है ब्लॉक वार स्थिति
जिले में 12 ब्लॉक है। इसमें नगर निगम अलीगढ़ को डार्क जोन, इगलास ब्लॉक को क्रिटिकल जोन, चंडौस, गंगीरी, जवां, खैर व लोधा को सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। इनमें धनीपुर, अतरौली, अकराबाद, बिजौली, गोंडा व टप्पल सामान्य शामिल हैं। इन ब्लॉकों में जलस्तर छह से आठ मीटर, यानी 10 से 15 फुट तक है।
रेन वॉटर हार्वेस्टिग सिस्टम और जल संचयन के नही हैं इंतजाम
शहर से लेकर देहात क्षेत्र में करीब चार हजार से अधिक सरकारी भवन हैं, लेकिन केवल 300 भवनों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हैं। शहर में अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) के नियमों के मुताबिक 300 वर्ग मीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल में बनाए जाने वाले नए भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इससे वर्षा के जल को एकत्र कर जमीन में प्रवाहित किया जाता है, ताकि भूगर्भ जल स्तर ऊंचा बना रहे। नक्शा पास कराने के लिए सभी भवन स्वामियों को एडीए में शपथ पत्र देना होता है। इस शपथ पत्र में शर्त होती है कि नवनिर्मित भवन में वह सिस्टम लगवाएगा। इसके लिए एक निर्धारित जमानत राशि भी जमा होती है। सिस्टम लगने के बाद इसे वापस कर दिया जाता है। भवन निर्माण के पांच साल के अंदर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाना अनिवार्य है। हालांकि दिए गए शपथ पत्र का अनुपालन नहीं हो रहा है।
महानगर के प्रमुख इलाकों का औसत जलस्तर (वर्ष 2019 से 2022 तक)
1- जवाहर पार्क 34.50 मीटर
2 - वेयर हाउस सारसौल-25.20 मीटर
3- एएमयू क्षेत्र-25.77 मीटर
4- प्राथमिक स्कूल पुलिस लाइन-31.37 मीटर
5- फायर स्टेशन कोल तहसील-26.85 मीटर
6- प्राइमरी स्कूल दोदपुर-27.60 मीटर
7- एएमयू कृषि फॉर्म-27.60 मीटर
8- प्राइमरी स्कूल धौर्रा माफी-22.75 मीटर
9- जूनियर हाईस्कूल नीबरी-21.63 मीटर
कुल औसत-26.95 मीटर
यह है जल दोहन का मानक
- सामान्य श्रेणी - 06 से 08 मीटर
-सेमी क्रिटिकल- 15 मीटर (लगभग)
- क्रिटिकल- 20 से 22 मीटर
- डार्क जोन-25 मीटर से अधिक
अत्यधिक जल दोहन वाली इकाइयां
- आरओ प्लांट- 150
- कार वॉशिंग सेंटर - 60
-बर्फखाना-करीब 25
- पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर प्लांट -04
- नगर निगम के नलकूप -90
यह है जिले में भूजल की स्थिति
- अलीगढ़ नगर क्षेत्र 26.95 मीटर
-इगलास ब्लॉक क्षेत्र 13.71 मीटर
-चंडौस ब्लॉक क्षेत्र 14.92 मीटर
-गंगीरी ब्लॉक क्षेत्र 18.78 मीटर
-जवां ब्लॉक क्षेत्र 11.25 मीटर
-खैर ब्लॉक क्षेत्र 8.63 मीटर
-लोधा ब्लॉक क्षेत्र 20.50 मीटर
-बिजौली ब्लॉक क्षेत्र 15.26 मीटर
-अतरौली ब्लॉक क्षेत्र 14.82 मीटर
-धनीपुर ब्लॉक क्षेत्र 17.27 मीटर
-अकराबाद ब्लॉक क्षेत्र 05.86 मीटर
-गोंडा ब्लॉक क्षेत्र 8.52 मीटर
-टप्पल ब्लॉक क्षेत्र 16.39 मीटर।
जिला उद्योग केंद्र में पंजीकृत इकाइयां
-20 बड़े कारखाने, -110 मध्यम कारखाने, -300 छोटे कारखाने, 16000 सूक्ष्म-लघु उद्योग।
नगर निगम डार्क जोन में आ चुका है। इससे निपटने के लिए कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल आदि का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगवाए जा रहे हैं। सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी व निजी इकाइयों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
- बीएस सुमन, नोडल अफसर, भूगर्भ जल एवं सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग
भूगर्भ जलस्तर सुधारने के लिए सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी एवं निजी विभागों को अनिवार्य रूप से रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने के निर्देश दिए गए हैं। बजट की समस्या के निवारण के लिए सभी विभागाध्यक्षों को प्रमुख सचिव के पास मांगपत्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
- अंकित खंडेलवाल, सीडीओ