उन्होंने कहा कि खुद को सनातन धर्म की हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार के राज में मंदिरों को इस तरह निशाना बनाया जा रहा है। जनभावनाओं और आस्था का सम्मान करने की बजाय प्रशासन तानाशाही रवैया अपना रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मंदिर को सुरक्षित रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के साथ निर्माण कार्य कराने की मांग उठाई। मंदिर समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं ने स्पष्ट कहा कि मंदिर को किसी भी कीमत पर हटाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने पिलर बेस पुल या अन्य वैकल्पिक निर्माण का मॉडल अपनाकर मंदिर को सुरक्षित रखने की मांग की।
करनी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र चौहान ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि मंदिर हटाने का प्रयास हुआ तो व्यापक विरोध किया जाएगा। गणेश मंदिर के महंत विनय नाथ ने कहा कि आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। मंदिर समिति ने प्रशासनिक अफसरों को मंदिर से जुड़े सभी अभिलेख व दस्तावेज भी दिखाए। लोगों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए यहां माैजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों और मंदिर समिति के सदस्यों से वार्ता कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। तब कहीं जाकर मामला शांत हो सका। इस अवसर पर अंशुल वार्ष्णेय, मुकेश वार्ष्णेय एडवोकेट, हैरी वार्ष्णेय, पुष्पेंद्र वार्ष्णेय, सचिन राघव, विष्णुकांत, दीपक राजपूत आदि समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु माैजूद रहे।
किसी की भी धार्मिक भावना को आहत नहीं किया जाएगा और बिना सहमति को मंदिर को यहां से किसी दूसरे स्थान पर स्थापित नहीं किया जाएगा। इसके लिए मंदिर समिति के पदाधिकारियों से लगातार बातचीत चल रही है, जल्द ही कोई न कोई स्थायी हल निकाल लिया जाएगा।- महिमा सिंह, एसडीएम कोल