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लोकल पैसेंजर ट्रेनें बंद, आधी कमाई गंवा रहे सफर में

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कमल पाठक - फोटो : CITY OFFICE
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राहुल दक्ष
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दिल्ली, एनसीआर की निजी कंपनियों में नौकरी करने वाले अलीगढ़ के लोगों को पहले लॉकडाउन में घर बैठना पड़ा। अब अनलॉक में वह नौकरी पर वापस लौट रहे हैं, तो दैनिक यात्रा भाड़े में उनकी आधी से ज्यादा कमाई चली जा रही है। कोरोना काल से पहले ये लोग लोकल पैसेंजर ट्रेनों में सफर कर सस्ते किराए में दिल्ली तक पहुंच जाते थे। मगर, अभी रेलवे ने ईएमयू ट्रेनों को बंद कर रखा है। दैनिक यात्री संघ ने रेलवे प्रशासन को को दो बार पत्र भेजकर कोविड स्पेशल ट्रेनों की तरह ईएमयू को भी चलाने की मांग की है। यात्रियों की परेशानी को भी रेलवे के सामने रखा लेकिन अभी तक बोर्ड स्तर से कोई निर्णय नहीं हो पाया है। हालात यह है कि लोग अब अपनी तनख्वाह और दैनिक भाड़े को देखते हुए नौकरी तक छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
जब लोकल पैसेंजर ट्रेन चलती थी, तब 355 रुपये की एमएसटी में एक माह का सफर होता था। अब दादरी में चार हजार रुपये माह का कमरा ले रखा है। इसके बाद बाहर का खाना-पीना भी महंगा पड़ता है। घर पर देने के लिए तनख्वाह ही नहीं बच पा रही है। सप्ताह में एक दिन भी घर जाते हैं तो एक तरफ से बाइक में करीब 400 रुपये का पेट्रोल लगता है। सरकार को यह मजबूरी समझनी चाहिए। - भुवेंद्र सिंह, दैनिक यात्री निवासी शिवा कॉलोनी
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ग्रेटर नोएडा स्थित एक निजी कंपनी में काम कर 30 हजार रुपये प्रति माह कमाता हूं। अगस्त तक प्रतिदिन घर से आना-जाना लगा रहा तो हर दिन का 500 से 600 रुपये का खर्च आ रहा था। मजबूरन सप्ताह में अब दो से तीन दिन जान पहचान वालों के यहां रुकना पड़ता है। इसके बाद भी बाहर खाने-पीने का खर्च बहुत आता है। घर चलाने तक को पैसे नहीं बच पाते।
- कमल पाठक, दैनिक यात्री निवासी विष्णुपुरी
कोरोना काल में कंपनी ने तनख्वाह 50 फीसदी कम कर दी है। अब मात्र 15 हजार रुपये ही मिलते हैं। दिल्ली से हर दिन अलीगढ़ तक आने-जाने में ही एक माह में यह पैसे खत्म हो जाते हैं। मजबूरी में नौकरी कर रहे हैं। अगर, सरकार लोकल पैसेंजर ट्रेनों को चला दे तो कम से कम किराए की मार से तो बच जाएंगे।
- युवराज किशोर पांडेय, दैनिक यात्री निवासी अब्दुल करीम चौराहा
मेट्रो चल सकती है तो स्पेशल ईएमयू क्यों नहीं
दैनिक यात्री संघ के अरविंद तिवारी ने बताया कि ईएमयू ट्रेनों से हजारों यात्री प्रतिदिन अलीगढ़ जंक्शन से दिल्ली और टूंडला की ओर सफर करते थे। सफर किफायती था। सैकड़ों दैनिक यात्रियों ने एमएसटी बनवा रखीं थीं। मगर. कोरोना के चलते इन ट्रेनों को अब बंद कर दिया गया है। रेलवे कम से कम सुबह-शाम के लिए एक स्पेशल ईएमयू ट्रेन या इंटरसिटी चलाने की अनुमति दे। इंटरसिटी में एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह ही रिजर्वेशन की सुविधा कर दी जाए। जब दिल्ली में सरकार ने मेट्रो को चलाने की अनुमति दे दी है तो उसी नियम के तहत ईएमयू क्यों नहीं चलाई जा सकती हैं।
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रेलवे अपने दैनिक यात्रियों के साथ खड़ा है। रेलवे बोर्ड को ईएमयू ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही इस प्रस्ताव पर विचार होने के साथ ही ट्रेनों के संचालन को मंजूरी मिल जाएगी। दैनिक यात्रियों का दर्द रेलवे अच्छे से समझ रहा है। मगर, कोरोना काल के कारण रेलवे मजबूर हो गया है।
- केशव त्रिपाठी, पीआरओ, प्रयागराज डिवीजन
कोरोना काल से पहले लोकल ट्रेनों का हाल
- 07 ट्रेनों का संचालन अलीगढ़ जंक्शन से होता था दिल्ली, कानपुर की ओर
- 15 हजार दैनिक यात्री हर दिन जंक्शन से नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, पलवल, फिरोजाबाद, टूंडला, कानपुर तक के लिए करते थे सफर
- 355 रुपये की एमएसटी में दैनिक यात्री एक माह करते थे सफर
- 06 माह से सभी रूट पर ईएमयू ट्रेनों का संचालन है बंद

युवराज किशोर पांडेय- फोटो : CITY OFFICE

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