सर सैयद अहमद खान ने न्यायाधीश के पद पर तैनाती के वक्त अपने मित्रों से कहा था कि वह ऐसी जगह यूनिवर्सिटी बनाएंगे, जहां न तो बाढ़ आए और न ही अकाल पड़े। इसके बाद ऐसी जगह की तलाश शुरू हुई। मंथन के बाद अलीगढ़ को चुना गया। तब यहां एएमयू की स्थापना हुई।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमर खान की पुण्यतिथि 27 मार्च को मनाई जाएगी। उनकी कब्र पर गुलपोशी की जाएगी।
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सर सैयद ने 9 फरवरी 1873 को बनारस में यूनिवर्सिटी का ख्वाब देखा था। बनारस में न्यायाधीश के पद पर तैनाती के वक्त उन्होंने अपने मित्रों से कहा था कि वह ऐसी जगह यूनिवर्सिटी बनाएंगे, जहां न तो बाढ़ आए और न ही अकाल पड़े। इसके बाद ऐसी जगह की तलाश शुरू हुई। मंथन के बाद अलीगढ़ को चुना गया। अलीगढ़ से गंगा-यमुना नदी काफी दूर हैं। भूमिगत जलस्रोत 20 फुट के नीचे थे।
एएमयू के पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद ने उस वक्त अलीगढ़ के सिविल सर्जन आर जैक्सन, कलेक्टर हेनरी जार्ज लॉरेंस व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर हंट की कमेटी बनाई, जिन्हें अलीगढ़ की भौगोलिक स्थिति जानने के लिए जिम्मेदारी सौंपी। कमेटी ने यहां की स्थिति बेहतर बताई। उन्होंने 1875 में मदरसा तुल उलूम की नींव रखी थी। 1877 में यही मदरसा मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के रूप में वजूद में आया। वर्ष 1920 में कॉलेज से यह विश्वविद्यालय बन गया। अलीगढ़ में कभी न तो अकाल पड़ा और न ही बाढ़ आई है।