सात मीटर की ऊंचाई पर होने चाहिए तार
बिजली निगम के एक्सईएन ग्रामीण उमेश जैन बताते हैं कि बिजली के खंभों की औसतन लंबाई लगभग साढ़े आठ से नौ मीटर तक होती है। खंभा डेढ़ मीटर तक जमीन के अंदर रहता है। सात मीटर की लंबाई ऊपर तार तक होती है। तार लगभग इतनी ही ऊंचाई में होने चाहिए। अगर सात मीटर से ऊंचाई कम है तो तार झूलने लगते हैं। कंचनपुर सहित अन्य आसपास के गांवों में यह ऊंचाई पांच मीटर तक रह गई है। जिससे तार छूते ही लोग करंट की चपेट में आ रहे हैं।
गांवों में 11 हजार वोल्ट की लाइन क्यों..
जब बिजली तारों से लंबी दूरी तय करती है, तो तारों के प्रतिरोध के कारण यह गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाती है। अगर वोल्टेज बढ़ा दिया जाए, तो करंट (एंपियर) कम हो जाता है। करंट कम होने से रास्ते में बिजली का नुकसान कम होता है। इसके अलावा वोल्टेज लो नहीं रहता है। जिससे नलकूप की मोटर भी चल जाती है। अगर 11 हजार वोल्ट की जगह 33 केवी का उपयोग हो तो खंभे, इंसुलेटर और ज्यादा ट्रांसफाॅर्मर लगाने से खर्च बढ़ता है। गांव में लगे स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर इस 11 हजार वोल्ट की बिजली को 415 वोल्ट (थ्री-फेस) और 230 वोल्ट (सिंगल-फेस) में बदलते हैं। इसके बाद बिजली घरों और नलकूप तक पहुंचती है। इसी वजह से गांवों में 11 हजार वोल्ट की लाइन पड़ी है।
सरिया छूते ही बुझ गए दो घरों के चिराग.. गीत में उकेरा कंचनपुर हादसे का दर्द
गांव कंचनपुर में विद्युत लाइन की चपेट में आने से हुई दो युवकों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। सांकरा क्षेत्र के गांव नगला बगिया निवासी कवि अवनेश कुमार शाक्य ने दोनों परिवारों के दर्द को शब्दों में पिरोया है-सरिया छूते ही बुझ गए दो घरों के चिराग..। अवनेश ने लिखा और गाया है कि--बनते मकान के सरिया विद्युत से टकराई, दो बेटों की लाश ने मातम दिया...। इस रचना में उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले संदीप और सहजुल के परिवारों की पीड़ा, मां के दर्द और घर में छाए मातम का जिक्र किया है।
संदीप की मौत का जिक्र करते हुए लिखा कि वह अपने परिवार का प्यारा बेटा था, जो पलभर में दुनिया से न्यारा हो गया..। उसकी शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं..। वहीं 14 वर्षीय किशोर सहजुल की मौत से मां के दुख को भी उकेरा है। देखी लाश सुत की मैया ने, धरती पर गिरकर छाती पीटी, सारी रात तड़पते निकली, चूल्हा नहीं जल पाया। हाल हुआ बेहाल गांव का, जब दो-दो हुईं जुदाई...। उनकी भावपूर्ण रचना सोशल मीडिया पर देखी जा रही है। लोग इसे साझा कर संवेदना जता रहे हैं।