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अफसर मौन: 11 हजार वोल्ट के झूलते तार, डेढ़ साल में आठ की माैत, हादसों से भी नहीं टूटी विभाग की नींद

Mon, 05 Oct 2026 10:37 AM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

कंचनपुर ही नहीं आसपास के छह गांवों में बीते डेढ़ वर्ष में ऐसी ही छह माैतें और हो चुकी है। आठ माैतों के बाद भी बिजली विभाग ने इन गांवों में झूलते तारों को ठीक करने की जरूरत नहीं समझी है। इसी क्षेत्र के गांव समैना तातरपुर में अशोक कुमार, नगला गुलरिया के काैशलेंद्र यादव, नगला सड़क के अजयपाल की भी ऐसे ही करंट लगने से माैत हो चुकी है। 
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कंचनपुर गांव में झूलते हाईटेंशन लाइन के तार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ में दादों थाना क्षेत्र के कंचनपुर गांव में 11 हजार वोल्ट की झूलती बिजली की लाइन से करंट उतरा और दो युवकों की माैत हो गई। एक अक्तूबर को हुई इस घटना के बाद से गांव में मातम छाया है। जान गंवाने वाले संदीप सिंह और सहजुल के परिजनों के आंसू थम नहीं रहे हैं।

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कंचनपुर ही नहीं आसपास के छह गांवों में बीते डेढ़ वर्ष में ऐसी ही छह माैतें और हो चुकी है। आठ माैतों के बाद भी बिजली विभाग ने इन गांवों में झूलते तारों को ठीक करने की जरूरत नहीं समझी है। इसी क्षेत्र के गांव समैना तातरपुर में अशोक कुमार, नगला गुलरिया के काैशलेंद्र यादव, नगला सड़क के अजयपाल की भी ऐसे ही करंट लगने से माैत हो चुकी है। 

गांव भाय, खुशीपुरा और राजमऊ में एक-एक माैत हुई है। इन गांवों में आए दिन लोगों को करंट लग रहा है। दादों क्षेत्र ही नहीं जिले के अन्य गांवों में भी झूलते बिजली के तार जानलेवा बन चुके हैं। ग्रामीण लगातार बिजली विभाग से इसकी शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

मेरे भतीजे संदीप की शादी होने वाली थी। घर में खुशी का माहाैल था, अचानक 11 हजार वोल्ट के झूलते तार से करंट लगने से उसकी माैत हो गई। जिस बहू को घर लाने की तैयारी थी, उसका रो-रोकर बुरा हाल है।-जय सिंह।

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मैं मवेशी लेकर जा रहा था, तार की चपेट में आने से करंट लग गया। गले में अब तक उस घाव के निशान हैं। कुछ दिन पहले ही दो भैंसों की भी करंट लगने से माैत हो चुकी है। कोई देखने तक नहीं आता है।-तिलक सिंह।
गांव से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन को बदल कर 440 वोल्ट कर दिया जाए। इसकी मांग कई वर्ष से हो रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लोग बहुत डरे हुए रहते हैं।-रामजीलाल।
अपने ही घरों की छतों पर जाने से डर लगता है। झूलते तार भूतल की छत और लिंटर से गुजर रहे हैं। जिससे महिलाओं और बच्चों की जान को खतरा है। अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।-राजू।
कंचनपुर में ही नहीं झूलते तारों से आसपास के छह-सात गांवों में लोगों की जान जा चुकी है, इसके बाद भी बिजली विभाग ने अब तक इस जानलेवा समस्या का समाधान नहीं कराया है। किसी जनप्रतिनिधि ने भी इसकी आवाज नहीं उठाई है।-शिशुपाल।
चार बार इन तारों को ठीक करने के लिए बिजली विभाग से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने अब तक ध्यान नहीं दिया है। आए दिन लोगों को करंट लग रहा है। युवाओं की जान जा रही है और कोई सुनने वाला नहीं है।-राजेंद्र कुमार, कंचनपुर गांव के प्रशासक के प्रतिनिधि।
कंचनपुर की घटना के बाद एसडीओ और जेई मौके पर गए थे। दोनों पीड़ित परिवारों से फॉर्म-44 भरवाया गया है। विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सेफ्टी मामले की जांच करेंगे। इसके बाद नियमानुसार पीड़ित परिवारों को मदद मिल सकेगी। कंचनपुर सहित आसपास के गांवों में 11 हजार वोल्ट की लाइन को शिफ्ट कराने का प्रस्ताव भी मुख्यालय को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका काम कराया जाएगा।-अरविंद नायक, मुख्य अभियंता,दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड अलीगढ़ जोन।

सात मीटर की ऊंचाई पर होने चाहिए तार
बिजली निगम के एक्सईएन ग्रामीण उमेश जैन बताते हैं कि बिजली के खंभों की औसतन लंबाई लगभग साढ़े आठ से नौ मीटर तक होती है। खंभा डेढ़ मीटर तक जमीन के अंदर रहता है। सात मीटर की लंबाई ऊपर तार तक होती है। तार लगभग इतनी ही ऊंचाई में होने चाहिए। अगर सात मीटर से ऊंचाई कम है तो तार झूलने लगते हैं। कंचनपुर सहित अन्य आसपास के गांवों में यह ऊंचाई पांच मीटर तक रह गई है। जिससे तार छूते ही लोग करंट की चपेट में आ रहे हैं।

गांवों में 11 हजार वोल्ट की लाइन क्यों..
जब बिजली तारों से लंबी दूरी तय करती है, तो तारों के प्रतिरोध के कारण यह गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाती है। अगर वोल्टेज बढ़ा दिया जाए, तो करंट (एंपियर) कम हो जाता है। करंट कम होने से रास्ते में बिजली का नुकसान कम होता है। इसके अलावा वोल्टेज लो नहीं रहता है। जिससे नलकूप की मोटर भी चल जाती है। अगर 11 हजार वोल्ट की जगह 33 केवी का उपयोग हो तो खंभे, इंसुलेटर और ज्यादा ट्रांसफाॅर्मर लगाने से खर्च बढ़ता है। गांव में लगे स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर इस 11 हजार वोल्ट की बिजली को 415 वोल्ट (थ्री-फेस) और 230 वोल्ट (सिंगल-फेस) में बदलते हैं। इसके बाद बिजली घरों और नलकूप तक पहुंचती है। इसी वजह से गांवों में 11 हजार वोल्ट की लाइन पड़ी है।
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सरिया छूते ही बुझ गए दो घरों के चिराग.. गीत में उकेरा कंचनपुर हादसे का दर्द
गांव कंचनपुर में विद्युत लाइन की चपेट में आने से हुई दो युवकों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। सांकरा क्षेत्र के गांव नगला बगिया निवासी कवि अवनेश कुमार शाक्य ने दोनों परिवारों के दर्द को शब्दों में पिरोया है-सरिया छूते ही बुझ गए दो घरों के चिराग..। अवनेश ने लिखा और गाया है कि--बनते मकान के सरिया विद्युत से टकराई, दो बेटों की लाश ने मातम दिया...। इस रचना में उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले संदीप और सहजुल के परिवारों की पीड़ा, मां के दर्द और घर में छाए मातम का जिक्र किया है।

संदीप की मौत का जिक्र करते हुए लिखा कि वह अपने परिवार का प्यारा बेटा था, जो पलभर में दुनिया से न्यारा हो गया..। उसकी शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं..। वहीं 14 वर्षीय किशोर सहजुल की मौत से मां के दुख को भी उकेरा है। देखी लाश सुत की मैया ने, धरती पर गिरकर छाती पीटी, सारी रात तड़पते निकली, चूल्हा नहीं जल पाया। हाल हुआ बेहाल गांव का, जब दो-दो हुईं जुदाई...। उनकी भावपूर्ण रचना सोशल मीडिया पर देखी जा रही है। लोग इसे साझा कर संवेदना जता रहे हैं। 
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