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Cyber Crime: डर-लालच और भरोसे का खेल है साइबर ठगी, किसान से कारोबारी तक हो रहे शिकार, कोई नहीं सुरक्षित

Mon, 08 Jun 2026 01:06 PM IST
Chaman Kumar Sharma अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

साइबर ठगी अब गांवों तक पहुंच गई है। स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग और सीमित सुरक्षा ज्ञान ठगों का हथियार है। मार्च से मई के बीच 2000 शिकायतों में 6 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हुई। रोजाना औसतन 22 लोग शिकार बन रहे हैं। किसान से छात्र तक सभी निशाने पर हैं। ऑनलाइन निवेश और फर्जी लिंक से लोगों को फंसाया जा रहा है। 
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साइबर ठगी के खिलाफ महिम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महानगरों से निकलकर साइबर ठगी अब गांव और कस्बों तक पहुंच गई है। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल, लेकिन साइबर सुरक्षा की सीमित समझ ठगों के लिए बड़ा हथियार बन रही है। अलीगढ़ की 800 से अधिक ग्राम पंचायतों में रहने वाले लोग भी अब इनके निशाने पर हैं, जिसके चलते साइबर ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। स्थिति यह है कि पिछले तीन महीने में रोजाना औसतन 22 लोग शिकार हुए हैं जिनसे 6.50 लाख रुपये की ठगी हुई है।

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ठगी का समाजशास्त्र : किसान से कारोबारी तक, कोई सुरक्षित नहीं
इस साल मार्च से मई माह के बीच 2000 लोगों ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई हैं। इस दौरान लुटेरों ने लोगों के खातों से 6 करोड़ 4 लाख 10 हजार रुपये उड़ा लिए। चिंताजनक बात यह है कि ठगी के शिकार होने वालों में किसान, छोटे कारोबारी, नौकरीपेशा लोग, छात्र और गृहिणियां तक शामिल हैं।

ठगी का मनोविज्ञान : डर, लालच और भरोसे पर होता है हमला
ऑनलाइन निवेश, पार्ट टाइम जॉब, केवाईसी अपडेट, फर्जी लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए ठग लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। साइबर अपराध का यह बढ़ता दायरा बता रहा है कि अब ठगों के निशाने पर सिर्फ बड़े शहर नहीं, बल्कि गांव और कस्बों में तेजी से बढ़ रहे स्मार्टफोन और इंटरनेट उपभोक्ता भी हैं।

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ठगी का अर्थशास्त्र : साइबर ठगी 25% बढ़ी, समय पर पता चले तो फ्रीज कराए दो करोड़
2025 में जनवरी से नवंबर माह के बीच जिले में 15 करोड़ की ठगी हुई। इस साल सिर्फ मार्च से मई के बीच लोगों ने छह करोड़ रुपये से ज्यादा गंवाए हैं। पुलिस स्वीकार रही है कि पिछले साल की तुलना में इस बार ठगी के मामलों में 25 फीसदी उछाल आया है। इसके पीछे पुलिस ठोस कारण नहीं बता पाई, लेकिन पुलिस का यह कहना जरूर है कि समय पर शिकायत मिलती है तो ठगी रकम को बचाने में सफलता भी मिल सकती है। एसएसपी नीरज जादौन ने बताया कि बीते तीन महीने में छह में से करीब दो करोड़ रुपये फ्रीज कराने में कामयाबी मिली। अब यह रकम वापस पीड़ितों तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

ठगी का भूगोल : अलीगढ़ में शिकार, तार छह राज्यों तक
साइबर ठगी के मामलों की जांच में सामने आया है कि अलीगढ़ के लोगों को निशाना बनाने वाले गिरोह सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। जनवरी से मई के बीच चिह्नित किए गए अधिकांश मोबाइल नंबर और बैंक खातों के तार झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़े मिले हैं। पिछले साल भी अलीगढ़ से जुड़े साइबर अपराधों में करीब 2500 मोबाइल नंबर चिह्नित कर ब्लॉक कराए गए जिनमें से अधिकांश इन राज्यों से संबंधित हैं।
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इस तरह फैलाया नेटवर्क : 1500 नंबर, 750 फोन, 60 हजार खातों पर रिपोर्ट
  • साइबर ठगी सिर्फ मोबाइल चलाने वाले अपराधियों तक सीमित नहीं है, इसके पीछे मोबाइल नंबर, हैंडसेट और बैंक खातों का पूरा नेटवर्क काम करता है। जनवरी से मई के बीच अलीगढ़ से जुड़ी साइबर ठगी की जांच में 1500 से ज्यादा मोबाइल नंबर चिह्नित हुए, जिन्हें राष्ट्रीय साइबर पोर्टल के जरिए ब्लॉक कराया गया। इसके अलावा 750 से ज्यादा मोबाइल हैंडसेट (आईएमईआई) भी ब्लॉक किए गए।
  • जांच में करीब 60 हजार बैंक खाते भी संदिग्ध पाए गए हैं। ये खाते ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए पहली, दूसरी और तीसरी लेयर के रूप में इस्तेमाल किए गए। इन खातों पर गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है।

ठगी का इलाज : जानकार बनें, सतर्क रहें
साइबर ठगी की शिकायतें 1930 हेल्पलाइन, राष्ट्रीय साइबर पोर्टल, साइबर सेल, साइबर थाना और स्थानीय थानों के माध्यम से दर्ज की जाती हैं। एक लाख रुपये तक की ठगी वाले मामलों की जांच साइबर सेल और उससे अधिक राशि वाले मामलों की जांच साइबर थाने के स्तर पर की जाती है। सबसे पहले शिकायतों में इस्तेमाल मोबाइल नंबर और खाते को तत्काल ब्लॉक कराने की कार्रवाई की जाती है, ताकि उनका दोबारा इस्तेमाल न हो सके। ठगी होने पर बैंक को सूचना दें फिर स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें और शिकायत दर्ज कराएं।

जागरूकता की पाठशाला : स्मार्टफोन है तो सुरक्षा भी जरूरी
लोगों का जागरूक होना बहुत जरूरी है। हम सबके हाथ में स्मार्टफोन है, सोशल मीडिया भी है। हमारे फोन में आने वाली कोई अनजान कॉल, मैसेज या फिर किसी फोटो/वीडियो/ओटीपी/केपीके फाइल को डाउनलोड नहीं करना चाहिए। मेरा मानना है कि अगर ठगी हुई है तो तत्काल शिकायत करें क्योंकि जितनी जल्दी एक्शन होगा, उतनी जल्दी रकम वापस लेने की संभावना रहती है। - नीरज जादौन, एसएसपी, अलीगढ़ पुलिस
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