वर्टिकल फार्मिंग अपनाकर कर रहे करेला की खेती
वर्टीकल फार्मिंग से करेला की खेती कर कमाई कर रहे नगला मोतीराय के पिता-पुत्र
दूसरों को भी परंपरागत खेती छोड़कर कुछ अलग करने की दे रहे सीख
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। विकास खंड मुरसान के गांव नगला मोती राय निवासी पिता पुत्र खेती में नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। अब उन्होंने वर्टिकल फार्मिंग की तकनीकी अपनाकर करेला की खेती है, जिससे अच्छा मुनाफा तो मिल ही रहा है। यह खेती पूरी तरह से जैविक भी है। इसमें कीट आदि को मारने के लिए भी खुद के द्वारा तैयार की गई जैविक कीटनाशक दवा का ही प्रयोग कर रहे हैं।
जहां पर किसान एक दूसरे को देखकर आलू और धान की खेती की ओर भाग रहे हैं। चंदपा क्षेत्र के गांव नगला मोती राय के किसान श्यामसुंदर शर्मा और उनके बेटे अमित शर्मा वर्टिकल फार्मिंग यानी खड़ी खेती कर रहे हैं। इसमें बांस लगाकर तारबंदी के बाद धागे बांधकर उस पर बेल चढ़ाकर खेती की जाती है।
प्रयोग के तौर पर की तीन बीघा फसल
हाथरस। इस बार उन्होंने प्रयोग के तौर पर तीन बीघा खेत में करेला की वर्टिकल फार्मिंग तकनीकी से खेती की है। इस फसल की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक है, जिसमें उन्होंने किसी तरह के रसायन का प्रयोग नहीं किया है। श्यामसुंदर शर्मा शिक्षक से रिटायर हैं तो उनके बेटे अमित शर्मा उच्च प्राथमिक विद्यालय बामौली मं शिक्षक हैं। रिटायरमेंट के बाद शर्मा अपने बेटे के साथ खेती में रुचि ले रहे हैं। प्रैक्टिकल के तौर पर की गई करेला की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है।
यू ट्यूब पर देख अपनाई तकनीकी
अमित शर्मा ने बताया कि वह एक दिन वर्टिकल खेती के संबंध में यू-ट्यूब पर कुछ खोज रहे थे। तभी उन्होंने एक वीडियो देखा, जिसमें हरियाणा के एक किसान ने इसी विधि से करेला की खेती की है। फिर क्या था, उसी दिन से इसकी तैयारी शुरू कर दी और अब वह भी वर्टिकल फार्मिंग को अपनाने वाले किसान बन गए।
जमीन से टच नहीं होते फल
वर्टिकल फार्मिंग की खास बात होती है कि इस खेती में फल जमीन पर टच नहीं करता है, जिससे वह खराब नहीं होता है। फसल की क्वालिटी अच्छी मिलती है। मंडी में उसका भाव भी अच्छा मिलता है।
करते रहते हैं नए प्रयोग
किसान श्यामसुंदर शर्मा ने बताया कि करेला की मेरी फसल अच्छी हुई है। इसमें किसी भी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें खेती में नए नए प्रयोग करने में आनन्द आता है। शिमला मिर्च के लिए कृषि विभाग की ओर से पुरस्कृत भी किया जा चुका है। इनके आसपास के किसान भी इनसे प्रेरित होकर धीरे-धीरे ऑर्गेनिक खेती अपना रहे हैं।
नगला मोती राय के पिता पुत्र अक्सर खेती में नए नए प्रयोग करते रहते हैं। ये दोनों हमारे किसान भाइयों के लिए आदर्श हैं, क्योंकि इनके द्वारा की जाने वाली खेती को अगर दूसरे किसान भी अपनाएंगे तो उन्हें भी अच्छा मुनाफा मिलेगा। इसके लिए विभाग किसानों को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।
-एचएन सिंह, उप कृषि निदेशक।