मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकता में गोवंश संरक्षण है। गोवंश संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, फिर भी जिले में गोवंश निराश्रित घूम रहे हैं। हालांकि हरेक तहसील में एक-एक गो संरक्षण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। एक केंद्र में करीब दो हजार गोवंश का संरक्षण हो सकेगा। अतरौली व गभाना तहसील में गोवंश संरक्षण केंद्र संचालित हो रहे हैं।
जिला स्तर पर सरकार ने गो संरक्षण केंद्र बनाने का फैसला लिया था। इसमें गभाना के नगला ओगर राजू में पहला गो संरक्षण केंद्र बनाया गया है। यहां निराश्रित गोवंश को रखा जा रहा है। अतरौली के नवीपुर में दूसरे गो संरक्षण केंद्र का निर्माण जारी है। खैर तहसील के गांव पालर, इगलास के गांव बड़ा बुजुर्ग व कोल के गांव नहरा में भी गोवंश संरक्षण केंद्र बनाने के लिए पांच-पांच एकड़ भूमि चिन्हित कर ली गई है। वृहद गो संरक्षण केंद्र का निर्माण मनरेगा, ग्राम पंचायत की संचित निधि, वित्त आयोग निधि आदि से किया जा सकेगा।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि जिले में 180 गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। यहां करीब 28 हजार से अधिक गोवंश संरक्षित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शहरी, स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम में अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों की स्थापना एवं संचालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से गोवंश के भरण पोषण के लिए अब तक 25 करोड़ से अधिक का बजट आवंटित किया जा चुका है।