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अलीगढ़ हत्याकांड: जाहिद ने पत्नी के दुपट्टे से घोंटा था बच्ची का गला, उसी में लिपटा मिला शव

Sun, 09 Jun 2019 08:02 AM IST
राजेश सिंह क्राइम डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
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आरोपियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए युवा - फोटो : अमर उजाला
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जिन सवालों के जवाब अब तक पुलिस के पास नहीं थे, उन सभी से पर्दा हट गया है। जाहिद व असलम की आनन-फानन गिरफ्तारी के चलते पुलिस कुछ सवालों के जवाब नहीं दे पाई थी। मगर आज जाहिद के भाई मेहंदी हसन व पत्नी सबुस्ता की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ के आधार पर बताया कि जाहिद ने अपनी पत्नी के दुपट्टे से बच्ची का गला घोंटा था और उसी में लपेट कर शव को पहले भूसे में रखा, फिर दुर्गंध आने पर शव को घर के सामने खाली प्लाट में कूड़े के ढेर पर डालकर ऊपर से रेत-मिट्टी डालकर उसे दबा दिया था।
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मगर कुत्तों की नोच-खोंच के कारण शव बाहर आ गया और सुबह छह बजे कूड़ा डालने आई महिला ने शोर मचा दिया। तब यह भेद खुला गया। इस दौरान पुलिस के आने से पहले एकत्रित हुई भीड़ ने जाहिद के परिजनों संग घर में घुसकर मारपीट कर दी थी। इससे परिवार दहशत में आ गया था और पुलिस के आने पर वहां से पूरा परिवार गायब हो गया। इन दोनों को अपनी रिश्तेदारी में बुलंदशहर के खुर्जा से दबोचा गया है।

एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि बच्ची के घर के ठीक सामने उसके रिश्ते के बाबा का घर है। उस घर में से आरपार रास्ता निकलता है जो जाहिद के दरवाजे पर खुलता है। परिवार ने पूछताछ में पहले ही दिन यह बताया था कि 30 मई को बच्ची खेलते-खेलते रोजाना की तरह बाबा के घर गई है। उसे तलाशते हुए बच्ची की मां वहां पहुंची तो वहां मौजूद चाची ने बताया कि अभी तो बच्ची अन्य बच्चों संग यहीं खेल रही थी। बच्चे बाजार सामान लेने गए हैं, वह बच्ची को ले जा रहे थे। मैंने उसे साथ ले जाने से मना कर दिया। बच्चे चले गए, मगर बच्ची यहीं थी।
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अब कहां गई, पता नहीं चला। किसी ने उसे उसके बाद नहीं देखा। दो जून को जब उसकी लाश मिली और पुलिस ने डॉग स्क्वायड की मदद ली, तो खोजी कुत्ता जाहिद के दरवाजे तक जाकर रुक गया। उसी समय से परिवार जाहिद पर शक जता रहा था। दस हजार रुपये के विवाद में उसे जाहिद पर हत्या का अंदेशा था। इससे अनुमान लगाया गया कि बच्ची किसी तरह खेलते-खेलते बाबा के घर से जाहिद के दरवाजे पर पहुंची होगी और वहीं से उसे अगवा किया होगा।

एसएसपी के अनुसार पूछताछ में गिरफ्तार महिला व उसके देवर ने स्वीकार किया कि बच्ची सुबह के समय गायब हुई। उसके कुछ देर बाद ही जाहिद ने घर आकर बताया कि उसने असलम के घर में ले जाकर बच्ची को असलम की मदद से मार डाला है। इससे पहले जाहिद कब अपनी बीवी का दुपट्टा ले गया, यह उसे नहीं पता। मगर अनुमान है कि जाहिद ने बच्ची के अपहरण के समय ही दुपट्टा लिया होगा। इसके बाद बच्ची को असलम के घर ले जाकर दुुपट्टे में से एक टुकड़ा फाड़कर उसका गला दबाया है।

इसके बाद शव उसी दुपट्टे में लपेटकर असलम के घर में ही भूसे में छिपा दिया। चूंकि असलम घर में अकेला रहता है, इसलिए वहां कोई झंझट भी न था। असलम की बीवी उसके कृत्यों के चलते पहले से ही बच्चों को लेकर मायके में रहती है। वहीं जाहिद की पत्नी अपने साथ बच्चों को भी ले गई थी, जबकि मेहंदी हसन अपनी गर्भवती पत्नी व बच्चों को भी साथ ले गया था। जाहिद व मेहंदी हसन के बच्चे रिश्तेदारी में हैं, जबकि दोनों को यहां गिरफ्तारी के बाद शनिवार शाम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

साफ मिला फ्रिज, शव रखे जाने का है अंदेशा 
इन दोनों की गिरफ्तारी से पहले शुक्रवार रात में फॉरेंसिक टीम ने जाहिद के घर व घटनास्थल पर बारीकी से साक्ष्य जुटाए थे। इस दौरान उसके घर में सफाई के साथ फ्रिज पूरी तरह से साफ मिला। इस पर पुलिस व फॉरेंसिक टीम का माथा ठनक रहा है। अंदेशा है कि यहां शव रखा गया होगा। इसके लिए वहां से साक्ष्य संकलित किए गए हैं। मगर गिरफ्तारी के बाद जाहिद की पत्नी ने बताया फ्रिज को तो ईद को पूरे घर के साथ साफ किया गया था। उसके घर में शव नहीं लाया गया।

जब हत्या गला दबाकर की, फिर पोस्टमार्टम में इतनी चोटें कैसे मिलीं
एक तरफ पहले दिन से पुलिस व गिरफ्तार आरोपी बच्ची की गला दबाकर हत्या की बात कह रहे हैं। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट, गले से नाक को जोड़ने वाली हड्डी टूटने के अलावा अन्य तमाम गंभीर चोटों के निशान हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आरोपी सिर्फ गला दबाने की बात कह रहे हैं तो फिर पोस्टमार्टम में इतनी चोट कैसे आईं। इस पर पुलिस यही दलील दे रही है कि शव को 47 डिग्री तापमान में कहीं भी भूसे में या मिट्टी में दबाकर रखा गया है। ऐसे में शव गला है और जब जानवरों ने उसे नोचा-खरोंचा है तो उसके चोट आई हैं। दूसरी बात यह भी शव को आरोपियों ने रखने में भी सहूलियतों का ध्यान नहीं रखा होगा। 

फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार, तभी बढ़ेंगी धाराएं
इस मामले में एक तरफ जहां आरोपियों पर रासुका के तहत कार्रवाई की औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं। वहीं धाराएं बढ़ाने को लेकर फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार चल रहा है। उसके आने पर रिपोर्ट का 

आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ेंगे अधिवक्ता, बार एसोसिएशन का फैसला: जनपद के अधिवक्ता शोक में दस जून को नहीं करेंगे काम
 दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन ने भी इस खौफनाक वारदात को लेकर रोष जाहिर किया। एसोसिएशन ने फैसला किया कि वह आरोपियों की कोर्ट में पैरवी नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बच्ची के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हुए सोमवार को न्यायिक कामकाज बंद रखने का फैसला किया है। इधर, अधिवक्ता नीरज चौहान ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े होते हुए उनका मुकदमा नि:शुल्क लड़ने का एलान किया है।

दीवानी परिसर स्थित दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन कार्यालय पर एसोसिएशन अध्यक्ष कैलाश बाबू गुप्ता की अध्यक्षता में आपात बैठक का आयोजन हुआ। सचिव अनूप कोशिश ने बैठक की जानकारी दी। इधर, अधिवक्ता नीरज चौहान ने कहा कि वह पीड़ित पक्ष के प्रति पूरी संवेदना रखते हैं। पीड़ित परिवार का मुकदमा वह तब तक नि:शुल्क लड़ेंगे जब तक आरोपियों को फांसी की सजा नहीं हो जाएगी। 
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