महानगर के नगला तिकौना की मकान स्वामी महिला को अगवा कर किरायेदारों द्वारा दुष्कर्म किए जाने के दोनों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला एडीजे फास्ट ट्रैक के न्यायालय से सुनाया गया है। इस मामले में खास बात है कि पीड़िता की दौरान-ए-परीक्षण मृत्यु हो गई, जिसके चलते वह गवाही के लिए अदालत में पेश नहीं हो सकी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता आरके तिवारी व राजकुमार लाहौर के अनुसार 22 सितंबर 2014 को महिला अपने बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास जाने की कहकर निकली। मगर देर रात तक नहीं लौटी। परिजनों की तलाश के बाद भी सफलता नहीं मिली। देर रात पुलिस को सूचना दी। इसी बीच सुबह तड़के मथुरा से एक फोन आया, जिसमें महिला के वहां बेहोश मिलने की जानकारी दी।
इस पर महिला को यहां लाकर दीनदयाल में भर्ती कराया। महिला ने अपने साथ मुकेश सैनी निवासी किशोर नगर मथुरा व जानकीशरण गोविंद विहार हाईवे मथुरा पर अपहरण व दुष्कर्म का आरोप लगाया। इसके कुछ दिन बाद महिला की मृत्यु हो गई। इनमें से एक आरोपी मुकेश पीड़ित का किरायेदार था। सत्र परीक्षण के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों के आगे साक्ष्य नहीं टिक पाए और आरोपियों को बरी कर दिया गया। दोनों आरोपी जेल में थे, जिनकी रिहाई के आदेश भी दिए गए।