फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडौस भी घूम गए नोएडा में दबोचे गए नक्सली

Tue, 18 Oct 2016 01:42 AM IST
अमर उजाला,अलीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
एटीएस की कार्रवाई के बाद सकते में आए चंडौस के दो युवकों के परिजन अपने बेटों को गुनाहगार मानने को तैयार नहीं। मगर आशीष के परिजनों ने स्वीकारा है कि उनके बेटे के साथ बिहार के दो व्यक्ति एक बार कार से उनके घर आए थे। यहां खाना खाने के बाद कुछ देर रुककर वह किसी फाइनेंसर से काम का हवाला देकर चले गए थे।
विज्ञापन


अब जब खबरों के जरिये उन लोगों के फोटो बेटे के साथ देखने को मिले तो पता चला है कि वह लोग नक्सली हैं। ऐसे में आईबी व एटीएस के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यह नक्सली यहां क्यों और किसके पास आए थे। इस सवाल का जवाब तलाशने में एजेंसियां जुट गई हैं।

नक्सलियों को हथियार सप्लाई में गिरफ्तार चंडौस के टैंट हाउस संचालक देवेंद्र सारस्वत के बेटे आशीष और पड़ोसी गांव थानपुर निवासी किसान मनवीर के बेटे ब्रजकिशोर के घरों पर सोमवार को भी सन्नाटा था। साथ में महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। इस दौरान देवेंद्र ने इतना ही बताया कि उनके बेटे को गिटार बजाने और क्रिकेट खेलने का शौक था। क्रिकेट के दौरान ही उसकी दोस्ती ब्रजकिशोर से हुई।
विज्ञापन


ब्रजकिशोर ने क्रिकेट में खूब हाथ पांव मारे, जबकि आशीष ने कई ऑडीशन दिए। मगर सफलता हासिल नहीं हुई। आशीष सात अक्तूबर को घर आया था। ब्रजकिशोर की उसके भाई से कहासुनी हो गई थी, जिससे वह गुस्से में था। घर से जाने की बात कहने लगा। चूंकि आशीष पहले से नोएडा में किसी बिल्डर के यहां कैशियर की नौकरी कर रहा था। उसने सुपरवाइजर के पद पर नौकरी लगवाने की बात ब्रजकिशोर से कही थी। इसलिए उसे 14 अक्तूबर को फोन करके बुलाया था।

आशीष सारस्वत-ब्रजकिशोर के दोस्तों और उनको हथियार सप्लाई कराने वालों तक पहुंचने के लिए एटीएस और आईबी ने चंडौस के साथ-साथ खैर इलाके में डेरा डाल दिया है। आईबी की टीम सोमवार को दोनों के घरों पर पहुंची। यहां उनके दोस्तों, उनके शिक्षण संस्थान, उठने बैठने के ठिकाने आदि की जानकारी ली। अब तक की जांच में पता चला है कि आशीष खुद एक दर्जन बार हथियार नक्सलियों को खैर इलाके से पहुंचा चुका है।

पिछले दिनों बन्नादेवी में दबोचे गए 40 पिस्टलों वाले गैंग से उसके गहरे ताल्लुक सामने आए हैं। खुफिया व एटीएस सूत्रों की मानें तो आशीष व ब्रजकिशोर एक दर्जन बार हथियार पहुंचा चुके थे। इसी बात की पुष्टि अब तक की जांच में हुई है और खुद उन्होंने स्वीकार लिया है। अब पुलिस उनके दोस्तों, उनको हथियार पहुंचाने वालों के अलावा उन लोगों तक पहुंचने को प्रयासरत है, जिनसे पिछले दिनों बिहार के दोनों नक्सली आशीष की मदद से यहां आकर मिले थे। इसके लिए बाकायदा टीमें खोजबीन में जुटी हैं।

क्रिकेट में माहिर ब्रजकिशोर की पहचान उसके खेल से थी। क्रिकेट प्रेमियों ने उसका नाम ललुआ रखा था। आर्थिक तंगी के चलते वह कोचिंग नहीं ले सका। एटीएस द्वारा पकडे़ जाने पर दोनों के परिवारों में अजीब सी खामोशी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें