जीएसटी से पहले माल के आयात-निर्यात के खेल में तालानगरी स्थित राधे स्टील्स फर्म करीब 26 लाख रुपये से अधिक की कर चोरी में फंस गई है। इतना ही नहीं फर्म फर्जी प्रपत्र पेश कर वाणिज्य कर विभाग को गुमराह करने की भी दोषी पाई गई है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने खंडाधिकारी को राधे स्टील पर एफआईआर कराने का निर्देश दिया है और कहा है कि यह फर्म संदिग्ध प्रतीत हो रही है और कर चोरी के लिए बनाई गई लग रही है। इसकी बारीकी से जांच कर आगे कार्रवाई की जाए।
पूरे देश में जीएसटी 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ है। उससे पूर्व कई फर्मों द्वारा कर चोरी का प्रयास किया गया। ऐसे फर्मों पर विभाग की नजर थी। इसी निगरानी में पाया गया कि जून महीने में तालानगरी स्थित राधे स्टील्स में 8.84 करोड़ रुपये का आयरन स्टील आना दिखा गया, जबकि 10.60 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई गई। इसके साथ ही 8.61 करोड़ रुपये का स्टॉक ट्रांसफर दिखाया गया।
मामला संदिग्ध पाए जाने पर वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों ने फर्म को नोटिस जारी किया। फर्म संचालकों द्वारा दो ट्रांसपोर्ट गंगा ट्रांसपोर्ट, मंजूरगढ़ी एवं न्यू पहलवान ट्रांसपोर्ट सूत मिल की बिल्टी पेश की गई। जांच के दौरान दोनों ट्रांसपोर्टरों ने राधे स्टील द्वारा पेश की गई बिल्टी को अपना मानने से इंकार कर दिया गया।
एसबीआई टीम के ज्वाइंट कमिश्नर एचटी राव दीक्षित ने बताया कि इस मामले में 26 लाख की कर चोरी और अब तक का ब्याज बन रहा है। फर्म द्वारा फर्जी प्रपत्र पेश करने पर खंडाधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने को निर्देशित किया गया है। अधिकारियों को यह संदेह है कि राधे स्टील फर्म कर चोरी के लिए ही बनाई गई है। इसलिए पूरे मामले की गहनता से अभी जांच चल रही है। जांच के आधार पर आगे कर निर्धारण की कार्रवाई की जाएगी।