पुलिस एनकाउंटर के विरोध में एएमयू में मार्च
- फोटो : Dig Vishal
अतरौली के मुस्तकीम एवं नौशाद एनकाउंटर के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा मार्च निकाला गया। इस दौरान यूपी पुलिस मुर्दाबाद एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगे। हालांकि प्रॉक्टोरियल टीम की मुस्तैदी के कारण छात्रों को बाब-ए-सैयद पर पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।
एएमयू छात्र मुस्तकीम एवं नौशाद के एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं। इसके विरोध में छात्रों द्वारा लाइब्रेरी कैंटीन से यूनिवर्सिटी सर्किल तक दोपहर 12 बजे मार्च का आयोजन किया गया था। लेकिन प्रॉक्टोरियल टीम एवं शिक्षकों की सक्रियता से बहुत से छात्र नेता मार्च में शामिल नहीं हुए। एएमयू छात्र संघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर लड़ने की तैयारी में जुटे हमजा मसूद एवं कुछ अन्य नेताओं के नेतृत्व में छात्र कैंटीन से बाब-ए-सैयद की तरफ बढ़े।
इस दौरान यूपी पुलिस एवं मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री के खिलाफ स्वर भी फुटे। बाब-ए-सैयद के पहले ही छात्रों को एएमयू प्रॉक्टर ऑफिस के सुरक्षाकर्मियों एवं अधिकारियों ने रोक दिया। उन्हें समझाया कि बिना अनुमति मार्च निकाल रहे हैं। आप सभी के खिलाफ कार्यवाही होगी। कैरियर प्रभावित होगा। काफी समझाने के बाद छात्र वहां से बिना किसी को ज्ञापन दिये वापस चले गए।
छात्र नेता हमजा मसूद ने बताया कि सर सैयद अहमद खान ने हमलोगों के हाथ में कलम सौंपी है। हमलोग इस लड़ाई को कोर्ट में जाकर लीगल तरीके से लड़ेंगे। एएमयू हमेशा जुल्म के खिलाफ खड़ा रहा है। इस संबंध में एएमयू जनसंपर्क कार्यालय के मेंबर इंचार्ज प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि छात्रों द्वारा मार्च निकालने के लिए अनुमति नहीं ली गई है। इसमें शामिल छात्रों के खिलाफ प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। हालांकि छात्र कैंपस से बाहर नहीं निकले। उन्हें समझाकर वापस भेज दिया गया।
विदेश में बैठे पूर्व छात्र ने की थी अपील!
एनकाउंटर के खिलाफ एएमयू में मार्च की अपील किसने की थी? यह प्रश्न सबसे अहम है। कैंपस में चर्चा है कि विदेश में बैठे एक पूर्व छात्र ने छात्र संघ चुनाव लड़ने वाले तमाम छात्र नेताओं की तरफ से यह अपील सोशल मीडिया के माध्यम से की थी। पूर्व छात्र द्वारा सभी पदों के संभावित प्रत्याशियों के नाम भी लिख दिए गए थे। छात्र नेता इसकी तैयारी में जुटे थे। अचानक ऊपर से दबाव बढ़ने के बाद बहुत से छात्र नेताओं के स्वर बदल गए। छात्र नेता जैद शेरवानी भी विरोध मार्च से पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इस मार्च में उनकी कोई भूमिका नहीं है और ना ही वह शामिल हुए। छात्र संघ चुनाव के अन्य बहुत से संभावित प्रत्याशी भी विरोध मार्च से दूर रहे। विरोध मार्च के आयोजन को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना भी शुरू हो गया है।