इगलास के गांव ताहरपुर के किसान दानवीर शर्मा के छह वर्षीय बेटे अनुज को गायब करने की साजिश उसके मां-बाप ने ही रची थी। कर्ज वापसी से बचने के लिए दानवीर ने बेटे को दिल्ली में एक परिचित के घर पहुंचाकर अपहरण का शोर मचाया था। पुलिस ने सर्विलांस के जरिये पूरा भेद खोल दिया। उसने बुधवार रात में ही गाजियाबाद लोनी बॉर्डर से बच्चे को बरामद कर लिया। साथ ही अपहरण का झूठा नाटक रचने पर मां-बाप सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेज दिया। इस नाटक से पर्दा उठाने पर एसएसपी ने पुलिस टीम को नकद इनाम देने की घोषणा की है।
प्रभारी एसएसपी/एसपी क्राइम आशुतोष द्विवेदी, एसपी देहात डॉ.यशवीर सिंह, एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव ने गुरुवार को पुलिस लाइन सभागार में संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता में बताया कि दानवीर शर्मा ने बुधवार को बेटे अनुज के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि वह सुबह 4 बजे गंगा स्नान के लिए नरौरा गया था, तभी उसका बेटा जामुन खाने जाने की कहकर निकला पर घर नहीं लौटा। दोपहर में उसके मोबाइल पर 15 लाख रुपये की फिरौती के लिए कॉल आई। इसके बाद पुलिस ने जब सर्विलांस की मदद से दानवीर के नंबर और फिरौती मांगने वाले के नंबर की डिटेल देखी तो पाया कि दानवीर तो नरौरा गया ही नहीं। वह सुबह घर से दिल्ली गया था और शाहदरा से वापस गांव आ गया। जिस नंबर से फिरौती की कॉल आई थी, उसकी लोकेशन भी दिल्ली में शाहदरा के आसपास मिली।
इस तथ्य के उजागर होने पर देर रात दानवीर से जब सख्ती से पूछताछ हुई तो वह टूट गया। उसने बताया कि बेटा दिल्ली में उसके ट्रैक्टर ड्राइवर रामेश्वर के दामाद लोकेश के यहां हाजीपुर बहेटा लोनी बॉर्डर गाजियाबाद में है। उसने खुद अपनी पत्नी ममता, ट्रैक्टर ड्राइवर रामेश्वर व उसके बेटे राजवीर संग मिलकर यह अपहरण का नाटक रचा है। उसने बताया कि उस पर गांव के कुछ लोगों का 12 लाख रुपये का कर्ज है। जिसका वे लोग तगादा कर रहे हैं। उनसे बचने के लिए यह नाटक रचा।
उसकी मंशा थी कि वह दो दिन बाद खुद बच्चे को वापस ले आएगा। गांव वालों को बताएगा कि 15 लाख रुपये की फिरौती देकर बच्चे को वापस लाया हूं। यह कहकर कर्ज मांगने वालों को शांत कर देगा। इसी योजना के तहत उसने पांच नए सिम फर्जी आईडी पर खरीदकर रामेश्वर के बेटे राजवीर को दिए थे। यहां से बाइक पर वह अपने बेटे व ड्राइवर को लेकर शाहदरा पहुंचा। वहां उसे रामेश्वर का बेटा राजवीर मिला।
वह दिल्ली में अपने बहनोई के घर रहकर नौकरी कर रहा था। वहां उसे बच्चा व पांचों सिम सौंप दिए। उसे समझा दिया कि जब वह गांव पहुंच जाए तो दोपहर बाद उन्हें फिरौती के लिए एक नंबर से फोन करना। इसके बाद उस सिम को तोड़कर नाली में फेंक देना और अगली बार दूसरी सिम प्रयोग करना। ताकि अपहरण की घटना सही साबित हो सके। इस खुलासे के बाद रात में ही पुलिस ने बच्चे को बरामद कर लिया। साथ में दानवीर, उसकी पत्नी ममता, ड्राइवर रामेश्वर और राजवीर को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद आरोपी दंपती को गुरुवार को पुलिस ने जेल भेज दिया। अब उनका बेटा अनुज व बेटी अंजली गांव में रिश्तेदारों के सहारे हैं।
कर्ज लेकर किए शाही शौक
पुलिस के अनुसार गांव ताहरपुर के ग्रामीण बताते हैं कि दानवीर शाही तरीके से रहता था। लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए दानवीर ऐशोआराम का जीवन जीता रहा है। इसके लिए वह दूसरों से कर्ज लेता रहा। हालांकि पूछताछ में उसने बताया कि बहन की शादी व मकान बनवाने के लिए यह कर्ज लिया था। कुछ दिन बाद आलू की फसल से वह कर्ज वापस करता, तब तक रुपये मांगने वालों को शांत करने के लिए उसने यह नाटक रचा था।
रिश्तेदार की मदद ने फेरा पानी
पुलिस के अनुसार दानवीर बच्चे के अपहरण की शिकायत पुलिस से नहीं करना चाह रहा था। अंदेशा था कि अपहरणकर्ताओं ने उसे पुलिस के पास न जाने की धमकी दी होगी। दानवीर के एक रिश्तेदार पुलिस में हैं। फिरौती की कॉल आने के बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों व थाने को सूचना देकर मदद मांगी। इस पर पुलिस भी गंभीरता से जुट गई और दानवीर अपने ही बुने जाल में फंस गया।
बच्चा बोला, मामा के पास ले गए थे पापा
पुलिस लाइन में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बच्चा भीड़ व पुलिस को देख बेहद डरा सहमा था। उसने इतना ही बताया कि मामा के पास जाने की कहकर पापा उसे दिल्ली ले गए थे। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं बता पाया।
खुलासा करने वाली टीम
इंस्पेक्टर इगलास सुनील कुमार वर्मा, इंस्पेक्टर गोंडा छोटेलाल, प्रभारी सर्विलांस अभय शर्मा, सर्विलांस से एमपी सिंह, विनोद कुमार, सुभाष चन्द्र, ऋषिपाल, ज्ञानवीर, प्रताप सिंह, धीरज त्यागी, पवन कुमार शर्मा, धर्मेन्द्र कुमार, कविन्द्र ढाका, विजय कुमार आदि।