एएमयू के भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोधार्थी रहे जिस मन्नान वानी ने कश्मीर घाटी में आतंक की राह पर चलने की वजह बताते हुए अपना एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल किया है और खुद को आतंकी होना बताया है। वह मन्नान वानी यूपी पुलिस के रिकार्ड में कब तक गुमशुदा रहेगा, यह सवाल एक बार फिर ज्वलंत हो रहा है।
हालांकि कानून के जानकार बताते हैं कि ऐसा पुलिस ने जानबूझकर नहीं, बल्कि कानूनी मजबूरियों के चलते कर रखा है। जब तक सेना या कश्मीर पुलिस की ओर से उसके जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने की खबर नहीं मिलती, वह यूपी पुलिस के रिकार्ड में इसी तरह गुमशुदा ही रहेगा। या एजेंसी उसे भगोड़ा घोषित कर यूपी पुलिस को अवगत कराएं। बता दें कि पिछले दिनों सेना ने कश्मीर के टॉप-10 आतंकियों की सूची में भी मन्नान को शामिल किया था।
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का मन्नान वानी यहां एएमयू में भूगर्भ विज्ञान का शोधार्थी था और हबीब हॉल में रहता था। उसके अचानक गायब होने के तीसरे दिन सोशल मीडिया पर उसका एक फोटो एके-47 के साथ आतंकी वेश में वायरल हुआ और हिजबुल मुजाहिदीन प्रवक्ता ने उसके संगठन में शामिल होने की घोषणा की।
इस खबर के वायरल होने पर अलीगढ़ से लेकर जम्मू तक की सभी एजेंसियां हरकत में आ गईं। इसी सिलसिले में जब 15 जनवरी को जम्मू पुलिस यहां आई और एएमयू से सवाल किया कि आपके स्तर से क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई तो आनन-फानन हबीब हॉल प्रोवोस्ट ने सिविल लाइंस में मन्नान की गुमशुदगी दर्ज कराई।
बाद में उस गुमशुदगी सूचना को जम्मू पुलिस अपने साथ ले गई और यूपी पुलिस मुख्यालय ने भी इस संबंध में सभी एजेंसियों व जम्मू पुलिस मुख्यालय को अवगत करा दिया। अब दो दिन पहले एएमयू के रिसर्च स्कालर से हिजबुल आतंकी बने मन्नान वानी का लेख सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। एक न्यूज एजेंसी को आतंकी संगठन की ओर से एट द कास्ट ऑफ अवर फ्रीडम लेख को मेल किया गया। इसमें उसने अपने आतंकी बनने के कारणों से लेकर कश्मीर मामले पर लिखा है। उसने लिखा है कि परिस्थितियों के चलते उसने हथियार उठाया है। इसके बाद भी वह कानून के अनुसार सिविल लाइंस पुलिस व डीसीआरबी रिकार्ड में आज भी वह गुमशुदा है।
यह बात सही है कि एएमयू से अचानक गायब हुए कश्मीर निवासी छात्र मन्नान वानी के आतंकी बनने के एजेंसियों से इनपुट मिले और फोटो वायरल हुए, जिस पर देश भर की एजेंसियां काम कर रही हैं। एएमयू की ओर से सिविल लाइंस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। जिसकी सूचना एजेंसियों व जम्मू पुलिस मुख्यालय को भेज दी गई। अब चूंकि उस पर एजेंसियां, सेना व जम्मू पुलिस काम कर रही हैं। वहां से यूपी पुलिस मुख्यालय या जिला पुलिस को उसके विषय में कोई लिखित सूचना नहीं मिलेगी या उसके जिंदा पकड़े जाने या मारे जाने की सूचना नहीं मिल जाती, तब तक कानूनन उसकी गुमशुदगी खत्म नहीं हो सकती।
- अतुल श्रीवास्तव एसपी सिटी