सर्द मौैसम में कोहरा वाहनों और वाहन चालकों के लिए खतरनाक सबित हो रहा है। मगर कोहरे से पहले इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया और रिफ्लेक्टर की कमी प्रमुख चौराहों पर एक्सीडेंट का कारण बन रही है।
रविवार सुबह नादा पुल के पास हुई दुर्घटना इसी का परिणाम रहा है। हम प्रमुख चौराहों पर अगर गौर करें तो किसी चौराहे पर रिफ्लेक्टर नजर नहीं आएंगे। ऐसे में रात हो या दिन एक्सीडेंट रुक पाना संभव नहीं हैं।
बात अगर नए बाईपास की करें तो बाईपास के डिवाइडर तक पर रिफ्लेक्टर नहीं हैं। प्रमुख चौराहों पर शहर में एंट्री या निकलते समय भी रिफ्लेक्टर कहीं नजर नहीं आते। प्रमुख रूप से क्वार्सी चौराहा, नादा चौराहा, बौनेर तिराहा, आगरा रोड पुल, मथुरा रोड पुल पर यही स्थिति है।
ऐसे में एक्सीडेंट होना आम बात है। रविवार को नादा पुल से मथुरा रोड बाईपास पर जो दो दर्जन वाहन कोहरे में आपस में भिड़े। इसकी वजह भी यही कमी रही है। वहां प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले एक-दो वाहन आपस में भिड़े थे।
मगर फिर पीछे से आते वाहन भी भिड़ते चले गए। अगर मोड़ पर रिफ्लेक्टर होते तो शायद यह स्थिति न बनती। वह तो गनीमत कि कोहरे में वाहनों की गति धीमी थी, इसलिए यात्री गंभीर जख्मी नहीं हुए। वरना हादसा बड़ा हो सकता था। कुल मिलाकर हाईवे और शहर के चौराहों पर दौडना खतरे से खाली नहीं है।