मुरादाबाद से आई नारकोटिक्स विभाग की टीम ने गुरुवार को शहर की थोक दवा की मंडी फफाला स्ट्रीट में छापा मारकर करीब 1.25 करोड़ रुपये की कीमत के इंजेक्शन और दवाएं पकड़ीं, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए (ड्रग एब्यूज) किए जानेे की बात कही जा रही है।
छापे में पकड़ा गया माल सील करके थाने की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। जबकि एक नाबालिग सहित चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। पकड़े गए लोगों पर आरोप है कि यह लोग बिना बिल आदि के ही थोक में इन इंजेक्शनों, दवाओं, सीरप आदि को दे दिया करते थे, जिनका इस्तेमाल शहर और देहात के पिछड़े इलाकों में लोग नशे के लिए करते हैं। देर रात टीम दस्तावेजों और माल की जांच कर रही है।
गुरुवार को दोपहर करीब 2.20 बजे मुरादाबाद से आई नारकोटिक्स विभाग की टीम के सहायक औषधि नियंत्रक (एडीसी) आरपी पांडेय के नेतृत्व में तीन औषधि निरीक्षकों की टीम महावीर गंज के रास्ते फफाला बाजार में दाखिल हुई। एडीसी आरपी पांडेय ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि फफाला मार्केट में कुछ थोक दुकानदार बिना बिल के ही ऐसी दवाएं बेच रहे हैं जिनका नशे के लिए इस्तेमाल हो रहा हैा।
बिल नहीं होने से इनकी ट्रेसिंग नहीं हो पाती है। इसके बाद टीम ने कई दिनों के प्रयास से रेकी कर मामले के साक्ष्य जुटाए। दुकानदारों पर गुप्त रूप से नगर रखी। इसके बाद गुरुवार को फफाला स्ट्रीट स्थित राधिका मेडिकल एजेंसी, किशोर मेडिकल एजेंसी, संजीव मेडिकल स्टोर, मामा मेडिकल स्टोर पर छापामार कार्यवाही की।
यहां से टीम ने करीब कुल 1.25 करोड़ रुपये के 200 पेटी माल, जिसमें स्पास्मोप्रोक्वीवान, एल्पाज्रापाम इंजेक्शन और टेबलेट व कोडिन जैसे सीरप शामिल हैं, को जब्त कर लिया। टीम ने दोनों दुकानदारों से चार लैपटॉप भी जब्त कर लिए। दोनों दुकानदारों व दुकान पर काम करने वाले एक नाबालिग लड़के सहित चार लोगों को हिरासत में लिया गया है।
16 साल बाद हुई है इतनी बड़ी कार्रवाई
जिला अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (रजि) के महामंत्री ठा. राजीव सिंह, कोषाध्यक्ष ब्रजेश कुमार, संगठन मंत्री मुनीष जैन, आलोक वार्ष्णेय, वीरेंद्र अग्रवाल, भूपेंद्र वार्ष्णेय आदि बताते हैं कि सन 2003 में दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने तत्कालीन डीआई (उस समय आरपी पांडेय ही डीआई थे) के साथ मिलकर इसी तरह की दवाओं का जखीरा पकड़ा था। यह बहुत बड़ा छापा था। लेकिन कुछ लोगों ने इस घटना में मुख्य आरोपी को हथियार के बल पर छुड़ा लिया था।
जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने दर्जनों लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मुख्य आरोपी के खिलाफ मुकदमा अभी भी दिल्ली में विचाराधीन है। उस समय की घटना को याद करते हुए दवा व्यापारी नेता कहते हैं कि दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने स्थानीय विभाग के रवैये पर हैरत जताई थी कि इतना बड़ा गैर कानूनी धंधा यहां पर हो रहा है और इसकी खबर विभाग को नहीं है।
स्पास्मोप्रोक्वीवान, एल्पाज्रापाम, नीला कैप्सूल भी कहते हैं
यह एक प्रकार का दर्द निवारक है। (इसे नीला कैप्सूल भी कहते हैं)। यह इंजेक्शन, गोली और कैपसूल की फार्म में उपलब्ध है। इसकी सामान्य मात्रा चिकित्सकीय उपयोग के लिए है। अधिक मात्रा नशे के लिए इस्तेमाल होती है।
सामान्य रूप से 500 रुपये का बिकने वाला डिब्बा, बिना बिल के बाजार में 3200 रुपये तक का बिकता है। आठ रुपये की एक गोली 70 से 80 रुपये तक बिकती है। यह सस्ता है और इसकी तीव्रता बहुत ज्यादा है। निम्न बस्तियों में इस तरह के नशे के आदियों की संख्या बहुत ज्यादा है।