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किस आंगन में गूंजेंगी शिवानी की किलकारी

Mon, 29 Feb 2016 09:38 PM IST
अभिषेक शर्मा/ अमर उजाला, अलीगढ़
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गभाना में अपनी मां की लाश के पास बेसुध मिली शिवानी को फिलहाल गोद नहीं, बल्कि फोस्टर केयर (देखभाल-संरक्षण) के लिए दिया जाएगा। यह व्यवस्था दो माह तक रहेगी। इसके बाद बच्ची को गोद मांगने वालों की देखरेख व संरक्षण संबंधी रिपोर्ट के आधार पर उसके भविष्य का निर्णय होगा। फिलहाल फोस्टर केयर के लिए दिए जाने पर भी बुधवार को विचार होगा। तब तक उसे मांगने वाले दोनों आवेदकों की ग्रेडिंग रिपोर्ट बाल कल्याण समिति ने जिला बाल संरक्षण इकाई से मांगी है।
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शिवानी को चाइल्ड लाइन द्वारा सोमवार को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। जहां जिला बाल संरक्षण इकाई से आए दोनों आवेदनों पर समिति के समक्ष चर्चा हुई। बताया गया है कि एक दंपति अलीगढ़ मुसलिम यूनीवर्सिटी से ताल्लुक रखते हैं, जबकि एक बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान में सेवारत हैं। दोनों की पारिवारिक, घरेलू स्थिति जानने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई से ग्रेडिंग रिपोर्ट मांगी गई है। 
एक टीम दोनों आवेदकों के घर, माहौल, व्यवस्था आदि का मौके पर जाकर परीक्षण करेगी। इसके बाद तय होगा कि बच्ची किसके पास रहेगी। साथ ही फिलहाल बच्ची को दो माह की फोस्टर केयर पर दिया जाएगा। दो माह तक अगर बच्ची के साथ व्यवहार व देखभाल की रिपोर्ट बेहतर रहेगी तो भविष्य में वहां रहने पर निर्णय हो सकता है। अन्यथा बच्ची को वापस लिया जा सकता है। 
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अब बुधवार को उसे फिर पेश किया जाएगा। तब तक बच्ची चाइल्ड लाइन के पास ही रहेगी। बता दें कि बच्ची को गोद लेने के लिए दो आवेदन आए हैं। वहीं अभी पुलिस के स्तर से बच्ची या उसके परिवार की पहचान नहीं हो पाई है। चाइल्ड लाइन के परियोजना निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा के अनुसार सोमवार को बच्ची को पेश किया गया था। मगर अभी दो दिन के लिए कोई निर्णय नहीं हो सका है।
क्या है फोस्टर केयरफोस्टर केयर का देश में एक लंबा इतिहास है। पहले केंद्र सरकार द्वारा 1960 के दशक में शुरू हुआ है। वर्तमान में इस एक्ट के तहत किसी भी सक्षम दंपति को बेसहारा बच्चे देखभाल के लिए प्रदान किए जा सकते हैं। 
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