फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मन्नान के कमरे तक पहुंची जम्मू-कश्मीर पुलिस

Wed, 17 Jan 2018 02:06 AM IST
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
विज्ञापन
हबीब हॉल का कमरा नम्बर 237, ‌इसी कमरे में रहता था मन्‍नान वानी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने के आरोपी शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के मामले की जांच के लिए आई जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीम अलीगढ़ मुस्लिम अलीगढ़ (एएमयू) के मो. हबीब हॉल के कमरा नंबर 237 के बाहर तक पहुंची। हालांकि बीती नौ जनवरी से मन्नान वानी का कमरा सील है। टीम के सदस्यों ने हबीब हॉल के प्रोवोस्ट, वार्डन व कर्मचारियों आदि से बातचीत कर जानकारी जुटाई।
विज्ञापन


एएमयू का शोध छात्र मन्नान बशीर वानी दो जनवरी के बाद से लापता है। मन्नान मूलरूप से जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के गांव लोलाब के अस्थान मोहल्ले का निवासी है। वह एएमयू के मो. हबीब हॉल (छात्रावास) के कमरा नंबर 237 में रहता था। दो जनवरी तक मन्नान के हस्ताक्षर हॉल के रजिस्टर पर हैं। इसके बाद से वह लापता है। सोशल मीडिया के जरिये उसके आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर आने के बाद कैंपस में भूचाल की स्थिति है। नौ जनवरी को एसएसपी राजेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में हबीब हॉल में छापेमारी कर मन्नान के कमरे के समान को जांच के लिए कब्जे में ले लिया गया। इसके साथ ही उसके कमरे को सील कर दिया गया। उसी दिन एएमयू प्रशासन द्वारा मन्नान को निष्कासित कर जांच बैठा दी गई। 

जम्मू-कश्मीर पुलिस यहां पहुंचकर दो दिन से मन्नान के मामले की जांच कर रही है। इस संबंध में वहां के अधिकारी प्रॉक्टर आफिस, भूगर्भ विज्ञान विभाग एवं हबीब हॉल में पहुंचे और संबंधित लोगों से पूछताछ की। जांच टीम के सदस्य मन्नान की गतिविधियों के अतिरिक्त उसके नजदीकी दोस्तों से संबंधित जानकारी भी जुटा रहे हैं। वे उसके एकेडमिक रिकार्ड भी देख रहे है। इस घटना के बाद से हबीब हॉल एवं भूगर्भ विज्ञान विभाग में एक अजीब तरह का सन्नाटा पसरा है। किसी अंजान व्यक्ति से बातचीत करने में भी लोग कतरा रहे हैं। एएमयू के डिप्टी प्रॉक्टर का कहना है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
विज्ञापन


मन्नान की जांच में अहम हो सकते हैं सीसीटीवी फुटेज 
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग का सीसीटीवी फुटेज शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के व्यवहार एवं गतिविधियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि यह इस बात पर निर्भर है कि विभाग में मौजूद सीसीटीवी फुटेज का खुफिया विभाग एवं एएमयू के अधिकारी कितना लाभ ले पाते हैं। विश्वविद्यालय का यह इकलौता विभाग है, जिसके प्रवेश द्वार से लेकर क्लास रूम तक पर कैमरे की नजर है।

विभाग के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने की खबर के बाद एएमयू में भूचाल की स्थिति है। एएमयू वीसी द्वारा एक दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। प्रॉक्टर आफिस एवं विभाग द्वारा भी इस मामले की जांच कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर की खुफिया एजेंसियां इस जांच में जुटी है। जांच से जुटे अधिकारी विभाग में मौजूद सीसीटीवी फुटेज का लाभ उठा रहे हैं या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यूनिवर्सिटी के बहुत लोगों को मालूम भी नहीं है कि विभाग में 12 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। प्रवेश द्वार से लेकर क्लास रूम तक कैमरे की निगाह में हैं। सूत्रों की मानें तो सीसीटीवी फुटेज का रिकार्ड करीब एक महीने तक सुरक्षित रहता है। इस हिसाब से देखें तो मन्नान से संबंधित बहुत सी जानकारी इसके माध्यम से मिल सकती हैं। 2 जनवरी 2018 तक मन्नान कैंपस में देखा गया था। उल्लेखनीय है कि डेढ़-दो साल पहले विभाग के तत्कालीन चेयरमैन प्रो. लियाकत अली राव ने निजी खर्चे से 12 सीसीटीवी लगवाए थे। विभाग में प्रवेश करने वाला हर शख्स कैमरे की निगरानी में रहता है। क्लास रूम में पढ़ाई हो रही है या नहीं, इसका पता भी आसानी से लगाया जा सकता है। विभाग का चप्पा-चप्पा इसके दायरे में है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें