एटा में मुफ्ती शहजाद अली की हत्या के मामले में वादी पक्ष और पैरोकारी कर रहे एटा के शराफत हुसैन काले ने कहा है कि हरदुआगंज के माछुआ में हुए एनकाउंटर में मारे गए दोनों बदमाश उनकी भी हत्या कर सकते थे। अगर वह पुलिस मुठभेड़ का शिकार नहीं होते तो छह निर्दोष हत्याओं के बाद अगला नंबर उनका भी हो सकता था।
शुक्रवार को मैरिस रोड स्थित होटल मैलरोज इन में मुसलिम समुदाय के लोगों की मौजूदगी में हुई प्रेस कांफ्रेंस में शराफत हुसैन काले ने कहा कि जिस तरह हमें फंसाने के लिए साबिर अली गैंग के बदमाशों ने एक के बाद एक हत्या की और मौका ए वारदात पर उनके मोबाइल नंबर की पर्ची को छोड़ा, इससे संभावना यह भी थी कि वह हमें भी निशाना बना सकते थे। शराफत हुसैन काले समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि मुफ्ती शहजाद की हत्या का मामला ट्रायल तक आ चुका है। इस केस में भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके। इसीलिए साबिर गैंग के सदस्यों ने निर्दोषों की हत्या को अंजाम दिया। मुठभेड़ में मारे गए मुस्तकीम व नौशाद आपस में सगे जीजा व साले थे। यह मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे।
नौशाद के पिता न होने के कारण बहन की शादी मुस्तकीम संग होने के बाद दोनों परिवार एक साथ ही रहते थे। कई दशक पहले यह लोग बिहार से छर्रा आकर बस गए थे। यह लोग एटा के शातिर बदमाश साबिर अली उर्फ दिनेश प्रताप के गैंग के लिए काम करते थे। साबिर और उसका बेटा नदीम एटा के शहजाद अली मुफ्ती की हत्या में शामिल थे।
प्रेस कांफ्रेेंस के दौरान मुसलिम समाज के 100 से अधिक लोग भी थे। इसमें अलीगढ़ और एटा दोनों जिलों के लोग थे। शराफत हुसैन काले ने कहा कि एनकाउंटर के पक्ष में बयान देने के लिए पुलिस या प्रशासन की ओर से उन पर कोई दबाव नहीं है। वह स्वेच्छा से इस बात को सभी के सामने कह रहे हैं।
जो लोग कह रहे हैं कि समुदाय विशेष के बदमाशों को मारा गया है तो हम यह कहना चाहेंगे कि हम भी मुसलमान हैं। जो बदमाश थे वह हमारा ही उत्पीड़न और खौफजदा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग एनकाउंटर को लेकर सवाल उठा रहे हैं लेकिन जिस तरह पुलिस ने बदमाशों के फर्जीवाड़े को भेदते हुए हमें न्याय दिया और बदमाशों पर शिकंजा कसा वह काबिले तारीफ है।
बदमाशों ने तो हमें फंसाने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने कहा कि यहां के बाद उन्होंने एसएसपी से मिलने के लिए समय लिया है। वह इस काम के लिए व्यक्तिगत रूप से मिलकर धन्यवाद अदा करेंगे। शराफत हुसैन काले समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी रह चुके हैं। इनकी पत्नी जिला का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। प्रेेस वार्ता के दौरान उलमा काउंसिल के निसार अहमद, काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष इफराहीम हुसैन, मुख्य रूप से जहीर अहमद, जमशेद आलम, जान आलम, कैसर अली आदि मौजूद थे।
फोन रिकार्डिंग कर डाटा पुलिस को देते रहे
शराफत हुसैन काले ने बताया कि अलीगढ़ में 12 अगस्त 2018 को अतरौली के पाली मुकीमपुर में तीन हत्याएं हुईं। इसके बाद सुबह 4.36 और 4.39 बजे हाजी कैसर अली को मोबाइल पर फोन किया कि जाने आलम ने जो काम बताया है वह हो गया है। 15 अगस्त को 4.31 बजे फिर से इसी नंबर से फोन आया और कहा कि काम हो गया है अब तुमसे (शराफत हुसैन काले) और सुएब से मर्डर का पैसा चाहिए। इसके बाद 18 सितंबर को शाम 6.43 बजे फोन आया। इसके बाद इसी दिन शाम 6.59 बजे फोन आया। जब मैंने (शराफत हुसैन काले) ने फोन मिलाया तो दूसरी ओर से पैसे न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद 26 अगस्त को रात को 8.03 बजे और 8.27 बजे फोन आया जिसमें 10 लाख रुपये की मांग की गई। न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ित इसकी सूचना मय काल रिकार्डिंग के अलीगढ़ पुलिस को देता रहा। इसके बाद 27 अगस्त को चार अलग अलग फोन नंबरों से फोन आए। इन नंबरों से बताया कि अतरौली में एक किसान की हत्या हो गई है। वहां जो नंबर मिला है उस नंबर से शराफत हुसैन काले व हाजी कैसर अली के नंबरों पर एक दिन पहले शाम को आठ आठ काल की गई हैं। जो मोबाइल वारदात स्थल पर मिला था, इस प्रकरण की सारी काल डिटेल व जानकारी पुलिस को दी गई। शराफत हुसैन ने बताया कि पुलिस भी समय समय पर हमसे पूछताछ करती रही। 15 सितंबर 2018 को चारों लोगों को अलीगढ़ पुलिस ने फिर बुलाया और बताया कि तीन और लोगों की हत्या हो गई है। पुलिस ने मुठभेड़ में मारे गए बदमाशों के फोटो उन्हें दिखाए गए जिसके बाद उन्हें पहचान लिया गया। शराफत हुसैन ने कहा कि अलीगढ़ पुलिस की सूझबूझ के कारण ही हत्याओं का खुलासा हुआ है।