गुरुवार को हरदुआगंज के माछुआ पर मुठभेड़ में मारे गए दोनों बदमाश गाजियाबाद की डासना जेल में भी बंद रहे हैं। चूंकि यह लोग प्रदेश और अन्य राज्यों में नाम पते बदल बदल कर धुमंतू अंदाज में वारदात को अंजाम देते थे, इस कारण इनके द्वारा अंजाम दी गई वारदातों की सही संख्या जुटाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है। लेकिन पुलिस का दावा है कि वह पूरा विवरण जल्द ही जुटा लेगी।
दूसरी ओर पुलिस मारे गए बदमाश नौशाद के भाई नफीस को हिरासत में लेकर पूछताछ भी कर रही है। नफीस से हुई पूछताछ के बाद पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई हैं। नफीस मानसिक रूप से परेशान जरूर है लेकिन वह व्यवहार और बातों से मानसिक रूप से बीमार नहीं लगता। उसने जो राज पुलिस के सामने खोले हैं उनसे पुलिस के माथे पर शिकन ला दी हैं।
नफीस ने पुलिस को बताया कि उन्होंने (साबिर, फरार चल रहे अफसर, मारे गए दोनों बदमाश और खुद नफीस) बुलंदशहर व बागपत में भी घटनाएं की हैं। गाजियाबाद की डासना जेल में वह अपने भाई (मारा गया बदमाश नौशाद) के साथ बंद रहा है। उसका एक रिश्ते का भाई (अफसर निवासी उझियानी बदायूं) अभी फरार चल रहा है। पुलिस सूत्रों का मानना है कि वही इन बदमाशों का अगुवा है।
इनका क्राइम करने का अंदाज बाबरिया गैंग की तरह ही है। नफीस पांच भाई हैं। पूछताछ में उसने अपने भाइयों के साथ कई लूट व हत्याओं की वारदातें कबूल की हैं। बुलंदशहर पुलिस व डासना जेल से भी इस बारे में संपर्क साधा जा रहा है।
कवाल के बवाल से जुड़े हो सकते हैं तार
हरदुआगंज में हुई पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गए दोनों इनामी बदमाशों के तार सन 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए चर्चित कवाल कांड से भी जुड़े हो सकते हैं। इस बात की आशंका पुलिस को इस आधार पर हो रही है कि बदमाशों की बोलचाल और भाषा शैली पश्चिमी उत्तर प्रदेश की है। जबकि पहले कहा जा रहा था कि बदमाश पूर्व में बिहार से पलायन करके उत्तर प्रदेश आए हैं। मारे गए बदमाश नौशाद का भाई नफीस स्वयं ही पुलिस पूछताछ में कह रहा है कि उन लोगों का बिहार से कोई लेना देना नहीं है। न कभी बिहार गए। उनकी सक्रियता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रही है। वह मुजफ्फर नगर और आसपास के सभी इलाकों के नामों और भौगोलिक स्थिति से वाकिफ है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस को आशंका है कि शायद मुजफ्फरनगर में हुए कवाल कांड के दौरान यह परिवार वहां से भागा हो और छर्रा में जाकर किराए के मकान में रहने लगे हों। एक साल से मुस्तकीम और नौशाद का परिवार अतरौली के मोहल्ला वैसपाड़ा में रह रहा है। जिले की पुलिस इनके बारे में मुजफ्फरनगर पुलिस से जानकारी जुटाने में लगी है। पश्चिमी यूपी के मेरठ, बुलंदशहर, बागपत आदि जिलों से भी इनकी क्राइम हिस्ट्री लेने के प्रयास पुलिस कर रही है। इनके तार शामली के झिंझयाना क्षेत्र से भी जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। बोलचाल की भाषा शैली भी पश्चिमी यूपी से मेल खाती है। जिस तरह से इन्होंने साधुओं को अपना निशाना बनाया है उससे संकेत यह भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं यह मुजफ्फरनगर कांड का गुस्सा तो नहीं। हालांकि इन पुलिस इनके बिहार का होने का दावा कर रही है मगर इनके बिहार के होने चांस कम ही नजर आ रहे हैं।
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वोटर लिस्ट में कैसे बढ़े नाम और कटे क्यों नहीं?
अतरौली। मुस्तकीम और नौशाद के परिवार के नाम छर्रा नगर पंचायत की वोटर लिस्ट में हैं। कुछ समय पहले ही यह छर्रा के मोहल्ला शिवपुरी में आकर किराए पर रहने लगे थे। तब इनके नाम किसके इशारे पर वोटर लिस्ट में बढ़े। क्योंकि इससे पहले की वोटरलिस्ट में इनके परिवार के किसी भी सदस्य के नामों का उल्लेख नहीं हैं। इसके बाद सवाल यह है कि जब इनका परिवार एक साल से अतरौली के मोहल्ला वैसपाड़ा में किराए पर रह रहा है तो इनके नाम छर्रा की वोटर लिस्ट से कटे क्यों नहीं?
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यासीन की पत्नी ने लिखा था पत्र
अतरौली। पुलिस द्वारा छह हत्या और लूट की घटनाओं में जेल भेजे गए एक अन्य आरोपी यासीन की पत्नी निहनाज ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग आदि को 16 सितंबर को चिट्ठी भेजी थी। जिसमें उसने कहा था कि पुलिस उसके पति को उठाकर ले गई है। पति को पुलिस ने कहां बंद कर रखा इसकी जानकारी नहीं दी जा रही। उसने अपने पति की एनकाउंटर कर हत्या की आशंका जताई थी।
अतरौली में किराएदारों का सत्यापन करेगी पुलिस
मुस्तकीम और नौशाद का परिवार एक साल से मोहल्ला वैसपाड़ा में रहा था और पुलिस को इस बात की भनक तक नहीं थी। अब कोतवाली पुलिस भी इस घटना के बाद सतर्क हो गई है। पुलिस अब अतरौली में किराए के मकानों में रह रहे लोगों का सत्यापन करेगी। किसके यहां कौन किराएदार कितने दिन से रह रहा है इसकी जानकारी एक रजिस्टर में अंकित होगी। साथ ही सभी के आधार कार्ड की फोटो कॉपी भी पुलिस अपने रिकार्ड में रखेगी।
निर्दोषों को मारा है पुलिस ने, सीबीआई जांच हो
राष्ट्रीय लोकदल के नेता शुक्रवार को अतरौली में मुस्तकीम और नौशाद के परिजनों से मिले। मुस्तकीम की मां शबाना और दादी रफीकन ने उन्हें बताया कि पुलिस नौशाद और मुस्तकीम को सबके सामने दिन में ही उठाकर ले गई थी। घर से ले जाकर पुलिस ने उन्हें मार डाला। रालोद नेताओं कहा कि पुलिस असली मुल्जिमों को तो ढ़ूंढ नहीं पाई निर्दोषों पर गोलियां बरसा दीं। उन्होंने मानवाधिकार आयोग में जाकर मामले की जांच की बात कही है। आरोप लगाया कि पुलिस ने मानसिक रूप से विक्षिप्त नफीस को थाने बैठा रखा है। उसके भी एनकाउंटर की आशंका है। पुलिस सही मुल्जिमों को पकड़कर जेल भेजे। निर्दोषों का उत्पीड़न बंद करे वरना आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। इस दौरान जिलाध्यक्ष चौ. रामबहादुर सिंह, डॉ. इरफान, हरचरन सिंह, प्रतीक चौधरी, रामवीर सिंह, सुनील रोरिया, पप्पू चौधरी आदि थे।
शव नहीं मिले परिजनों को
दोनों बदमाशों के शव अलीगढ़ में ही दफन किए गए। परिजनों को शव दफन करने को नहीं मिले। परिजनों का आरोप है कि बिना नमाज के ही पुलिस द्वारा शवों को दफन कर दिया गया।
‘साधुओं की सिलसिलेवार हत्याकांड से जुड़े गैंग और मुठभेड़ में मारे गए मुस्तकीम और नौशाद के कुछ करीबी बदमाश और एक भाई से पूछताछ चल रही है। अब तक की पूछताछ में उन्होंने डासना जेल में बंद रहने की बात स्वीकार की है। इसको ट्रेस किया जा रहा है। बाकी पश्चिमी यूपी के सभी जिलों की पुलिस से संपर्क कर इनके आपराधिक रिकार्ड की जानकारी जुटाई जा रही है। जहां तक इनके बिहार के होने का ताल्लुक है तो बिहार की तो जाने दीजिए इनका मूल पता अभी भी पता नहीं लग पा रहा है’
- अजय कुमार सहानी, एसएसपी