सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर मन्नान बशीर वानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में काफी दखल रखता था। दिसंबर 2017 में आयोजित एएमयू छात्र संघ चुनाव के दौरान भी वह बेहद सक्रिय था। कुछ वर्ष पहले के चुनाव में भी उसने एक छात्र नेता को चुनाव लड़ाने एवं जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।
यह अलग बात है कि वह खुलकर कभी सामने नहीं आया। वह पर्दे के पीछे रहकर काम करता था। जम्मू-कश्मीर के छात्रों के बीच वह कश्मीर की आजादी का कट्टर समर्थक था। आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद आजादी से संबंधित एक कैलेंडर जारी करने को लेकर उसका नाम चर्चा में आया था, लेकिन उस समय यह मामला दब गया था या दबा दिया गया था।
मन्नान के करीबी उसके विचार एवं तुनकमिजाजी से आशंकित रहते थे और उसे समझाने का प्रयास भी करते थे। मन्नान को जानने वालों की मानें तो वह पढ़ाई में भी होनहार था और पेपर प्रस्तुतीकरण में उसने अवार्ड भी जीता था। जम्मू-कश्मीर के छात्रों की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों की मानें तो एएमयू में जम्मू-कश्मीर के छात्रों के दो गुट हैं। यह भी चर्चा है कि एक गुट द्वारा दिल्ली में मन्नान बशीर वानी की शिकायत की गई थी। हालांकि इस संबंध में कुछ भी बोलने से जम्मू-कश्मीर के छात्र कतराते हैं।
जनवरी में एएमयू के हबीब हॉल से लापता हुआ था मन्नान वानी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोध छात्र से आतंकी बने मन्नान बशीर वानी का काम नौ महीने में तमाम हो गया। वह एएमयू के हबीब हॉल में रहता था।
शोध छात्र मन्नान बशीर वानी जनवरी 2018 में अचानक एएमयू से गायब हो गया था। उसके आतंकी संगठन में शामिल होने की चर्चाओं से संबंधित खबर सबसे पहले अमर उजाला में प्रकाशित हुई थी। उसके बाद से पूरे देश में खलबली मच गई थी। तत्कालीन एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने एएमयू के हबीब हॉल में छापा मारकर मन्नान वानी का कमरा सील कर दिया था। पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना हो गयी थीं। बाद में खबर आयी कि वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया है। उससे संबंधित तस्वीरें सोशल मीडिया में आयी थीं। एएमयू प्रशासन द्वारा मन्नान वानी को निष्कासित कर दिया गया था। मन्नान बशीर वानी ने वर्ष 2013 में एमएससी में एएमयू के भूगर्भ विज्ञान विभाग में दाखिला लिया था। यहीं से 2014-15 में एमफिल की। उसके बाद विभाग के प्रो. सैयद अली अहमद के निर्देशन में शोध कर रहा था। एमफिल एवं एमएससी के दौरान वह हबीब हॉल के कमरा नंबर क्रमश: 72 एवं 41 में रहा। नवंबर 2016 में पीएचडी में दाखिला लिया। उस समय वह हबीब हॉल के कमरा नंबर 237 में रहता था।