स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला है कि हाईवे भांकरी स्थित जेडी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की एंबुलेंस गांव-गांव जाकर प्रचार कर आयुष्मान मरीजों को अस्पताल लाती थी। मरीजों को मुफ्त खाने व इलाज का लालच देकर एजेंट अस्पताल में भर्ती कराते थे। मृतक देवी शरण को भी ऐसे ही लाया गया था। स्वास्थ्य विभाग इन्हीं बिंदुओं पर जांच कर रहा है। वहीं, इस निजी अस्पताल के संचालक सुनील मित्तल ने भी प्रचार-प्रसार की बात स्वीकार की है।
मित्तल ने बताया कि हमारा उद्देश्य ग्रामीण इलाकों की जनता को इस योजना का लाभ दिलाना है। प्रचार के दौरान ग्रामीणों से अपील की जाती है कि किसी भी समय इलाज की आवश्यकता होने पर वे अस्पताल को फोन कर एंबुलेंस बुला सकते हैं। अस्पताल का फायदा यह रहता है कि यहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थी सीनियर डॉक्टरों की निगरानी में इलाज की बारीकियां सीखते हैं।
सीएमओ डॉ बीपी कल्याणी ने बताया कि आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज करना अलग बात है। लेकिन एंबुलेंस व एजेंटों के जरिये प्रचार प्रसार कराना गलत है। स्वास्थ्य विभाग इन्हीं बिंदुओं पर जांच कर रहा है। जेडी अस्पताल का एक अप्रैल 2020 से अब तक भर्ती आयुष्मान योजना के मरीजों का रिकॉर्ड निकलवाया जा रहा है। इन सभी मरीजों के बयान लिए जाएंगे। इस दौरान आयुष्मान कार्ड से लिए गए भुगतान की जांच की जाएगी। यदि गड़बड़ी मिली तो अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक सभी भुगतानों पर रोक लगा दी गई है।
एसडीएम गभाना प्रवीण यादव ने बताया कि पूर्व में चंडौस के अस्पताल में आयुष्मान योजना में फर्जी भुगतान का मामला मिला था। जेडी अस्पताल में हुई जांच में पता चला है कि वहां का स्टाफ यहां आ गया है। सीएमओ ने अस्पताल के आयुष्मान योजना के तहत भुगतान पर रोक लगा दी है। मरीज की मौत के कारणों की जांच मेडिकल पैनल से कराई जा रही है।
- देवी शरण की तबियत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कालेज रेफर करने के लिए परिजनों को बुलाया गया था, लेकिन कोई नहीं आया। उसे घर के सामने फेंकने की बात गलत है।
- सुनील मित्तल, संचालक, जेडी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज