दुष्कर्म पीड़ित किशोरी बुधवार को गर्भपात कराने की इजाजत मांगने पुलिस कप्तान के दरबार पहुंची। उसकी फरियाद सुनने के बाद एसएसपी कार्यालय से पीड़िता को बताया गया कि इसकी इजाजत अदालत देती है। चिंताजनक स्थिति यह है कि दुष्कर्म की वारदात को दो माह 24 दिन हो चुके हैं।
इस पर विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि तीन महीने के बाद ऐसे मामलों में बेहद जटिल हालात पैदा हो जाते हैं। बन्ना देवी थाना क्षेत्र दुष्कर्म पीड़िता की इस समय उम्र 13 वर्ष तीन माह है। उसकी मां की मृत्यु हो चुकी है और पिता मजदूूरी करता है। पीड़िता ने एसएसपी को बताया कि होली पर किसी रिश्तेदार की मृत्यु होने पर पिता घर से बाहर थे। घर पर उसकी चाची की बहन का बेटा था।
आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म कर दिया। कुछ दिनों बाद जब उसकी तबियत खराब हुई तो परिवार डाक्टर के पास ले गए, जहां पता चला कि वह गर्भवती है। इसके बाद पीड़िता ने परिजनों को पूरे मामले की जानकारी देकर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। पूरा मामला सुनने के बाद पुलिस ने पीड़िता के साथ सहानुभूति जताते हुए गर्भपात कराने के मामले में न्यायालय की शरण लेने की सलाह दी।
‘जैसी जानकारी दी गई है, उसके हिसाब से पीड़िता की उम्र कम है। अगर कुछ दिन और बीत गए तो फिर एमटीपी (मेडिकली टर्मिनेटेड प्रिगनेंसी) संभव नहीं होगी। अदालत की अनुमति के बाद इस काम को डाक्टरों का पैनल करेगा। पीड़िता की जान को खतरा न हो इसके लिए जल्द से जल्द इजाजत मिले’
डॉ. गीता प्रधान, अपर निदेशक स्वास्थ्य
‘अगर पीड़ित परिवार इस मामले में अदालत का रुख करने में देरी नहीं करता है, तो अदालत को इस प्रकरण में इजाजत देने में समय नहीं लगना चाहिए। मानवीय आधार पर अदालत ऐसे मामलों को लंबित नहीं रखती है। परिस्थिति को देखकर जल्द फैसला देती हैं’
राम कृष्ण तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता