क्राइम न्यूज ,अमर उजाला, अलीगढ़।
महानगर के गोंडा रोड इलाके में मंगलवार रात एक घर में अकेली मौजूद विवाहिता की गला रेतकर नृशंसतापूर्वक हत्या कर दी गई। बुधवार सुबह जब विवाहिता की मां अपनी बेटी से मिलने पहुंची तो इस हत्या का भेद खुला। खबर पर पुलिस भी पहुंच गई। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल मायके पक्ष ने पति व अन्य ससुरालियों पर दहेज के लिए हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। मगर पुलिस इस हत्या के मूल में दहेज के बजाय संपत्ति विवाद हत्या का अंदेशा जताकर जांच कर रही है।
वाकये के अनुसार मूल रूप से कासगंज निवासी महेश चंद्र माहेश्वरी कई साल पहले यहां रामनगर जलालपुर देहली गेट में आकर बस गए। उन्होंने अपनी बेटी कविता की शादी करीब ढाई साल पहले गोंडा रोड खैर रोड चौराहा देहली गेट निवासी रवि उर्फ लल्ला पुत्र किशनलाल संग की थी। रवि का परिवार यहां दो मंजिला मकान में रहता है।
नीचे परिवार ढाबा चलाता है और ऊपर रवि व उसकी पत्नी रहती थी। किशनलाल पास में ही दूसरे मकान में बड़े बेटे गौरव के साथ रहते हैं। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही रवि की अपने भाई से नहीं बन रही थी। वह अक्सर कामकाज के सिलसिले में दिल्ली रहता है। इसी बीच ससुरालियों की ओर से दहेज की मांग शुरू कर दी गई। ताकि रवि को कोई रोजगार कराया जा सके। इसी बीच कविता बीमार रहने लगी तो खाने पीने तक की समस्या हुई। इसके चलते उसकी मां संतोष कुमारी उसे खाना देने जाया करती थीं।
मंगलवार रात भी वह खाना देने गईं तो सब कुछ ठीक था। मगर सुबह 9 बजे करीब जब संतोषी अपनी बेटी के पास उसे देखने पहुंचीं तो दंग रह गईं। कविता की लाश कमरे में जमीन पर पड़ी थी और उसका गला चाकू या अन्य किसी धारदार हथियार से रेता गया था। उसके कपड़े भी अस्त व्यस्त थे। लग रहा था जैसे उसे नृशंसतापूर्वक मारा गया है।
इस सूचना पर सीओ प्रथम, इंस्पेक्टर देहली गेट आदि पहुंच गए। जांच पड़ताल के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। सीओ विशाल पांडेय के अनुसार जांच में परिवार में संपत्ति विवाद भी उजागर हो रहा है।
रवि पर कोई संतान भी नहीं है। फिर भी मायके पक्ष ने दहेज को लेकर कविता की हत्या का मुकदमा ससुर किशनलाल, जेठ गौरव, पति रवि, ननद दुर्गेश व ननदोई अमलोक के खिलाफ दर्ज कराया है। जिसकी जांच की जा रही है। जो भी तथ्य उजागर होंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
नि:संतान मां-बाप की दत्तक पुत्री थी कविता
बेटी की मौत की खबर पर मां-बाप की तो मानो दुनिया ही उजड़ गई थी। उनका रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस को बताया गया कि महेश चंद्र दंपती के कोई संतान नहीं थी। इसलिए उन्होंने अपनी रिश्तेदारी में से कविता को गोद लिया था। जब वह जवान हुई और शादी योग्य हुई तो उन्होंने यह तय किया था कि इसकी शादी अपने घर के आसपास ही करेंगे, ताकि अक्सर बेटी से मिलना जुलना रहे। इतने के बावजूद वह अपनी बेटी को खो देते हैं, इस बात का दोनों को बेहद मलाल था।