कौशल कुमार ओझा, अमर उजाला, अलीगढ़।
करीब 15 महीने पहले उड़ी सेक्टर में शहीद हुए 17 जवानों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कश्मीर के छात्र मुदस्सिर यूसुफ लोन को क्षमा याचना के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में फिर से पढ़ाई का मौका मिला था।
शोध छात्र मन्नान बशीर वानी ने विश्वविद्यालय एवं सरकार की इस उदारता का भी ख्याल नहीं रखा। प्रतिबंधित आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद जम्मू-कश्मीर के कई छात्र उसके फैसले से नाखुश व दुखी हैं।
सितंबर 2016 में एएमयू के रसायन विभाग के एमएससी छात्र मुदस्सिर यूसुफ लोन ने उड़ी में शहीद हुए जवानों पर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर तहलका मचा दिया था।
इस टिप्पणी के बाद अलीगढ़ का माहौल गरम हो गया था। तत्कालीन कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने तत्काल प्रभाव से आरोपी छात्र को निष्कासित कर दिया था।
इसको लेकर बहुत बखेड़ा हुआ था। निष्कासन के बाद छात्र गायब हो गया था। सूत्रों की मानें तो बाद में यूसुफ द्वारा प्रधानमंत्री से क्षमा याचना की गई। तत्कालीन कुलपति ने सिम्पेथी ग्राउंड पर निष्कासन को खत्म कर दिया। विभागाध्यक्ष प्रो. एम शाकिर ने बताया कि छात्र मुदस्सिर पढ़ाई कर रहा है।
कश्मीर के एक छात्र ने बताया कि किसी प्रतिक्रिया में भटके हुए युवा को वापस मुख्य धारा में लाने की यह बेहतर मिसाल है, लेकिन मन्नान ने इसका भी ध्यान नहीं रखा।