क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अधिवक्ता अनूप कौशिक के पिता सेवानिवृत्त एसडीआई राम औतार शर्मा के देयकों के भुगतान संबंधी प्रकरण में निबंधक राज्य लोक सेवा अधिकरण (ट्रिब्युनल) के बुलावे पर हाजिर न होना बीएसए को भारी पड़ गया। ट्रिब्युनल ने इस मामले में बीएसए लक्ष्मीकांत पांडेय के खिलाफ वारंट जारी कर दिए। जिस पर बीएसए ने सीजेएम न्यायालय में सरेंडर किया और उन्हें दस हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर जमानत पर रिहा किया गया।
वाकया सुरेंद्र नगर निवासी सेवानिवृत्त एसडीआई रामऔतार शर्मा के वर्ष 1986 से 1999 तक के एरियर भुगतान से जुड़ा है। यह प्रकरण ट्रिब्युनल में लंबित है। प्रकरण के अनुसार सेवाकाल में उन्हें निलंबित किया गया था। इसी बीच वह सेवानिवृत्त भी हो गए।
अदालत के आदेश पर उनकी पेंशन आदि तो शुरू हो गई, मगर सेवाकाल का एरियर आज तक नहीं मिला। इसका मुकदमा ट्रिब्युनल में चल रहा है। इस मामले में भुगतान आदि के संबंध में बीएसए लक्ष्मीकांत पांडेय को ट्रिब्युनल द्वारा तलब किया गया। कई बार तलब किए जाने के बाद भी वह हाजिर नहीं हुए तो ट्रिब्युनल ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिए।
सीजेएम न्यायालय ने बन्नादेवी पुलिस के माध्यम से यह वारंट तामील कराए। इसी आधार पर 24 अक्तूबर को खुद बीएसए कोर्ट में हाजिर हुए, जहां उन्हें सरेंडर करने पर निजी बंध पत्र पर जमानत दी गई।