क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
यह पहला मौका नहीं है जब जिले के पोस्टमार्टम हाउस पर शव के साथ शर्मनाक घटना हुई है। यहां पर कुत्तों, नेवलों, चूहों आदि द्वारा शवों को क्षति पहुंचाने की घटनाएं भी अक्सर सामने आती रही हैं। मामले का दूसरा पहलू यह है कि पोस्टमार्टम हाउस में सुविधाएं तो बढ़ीं, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही कम नहीं हुईं।
सन 2003 में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाली संस्था ‘मानव उपकार’ को पता लगा कि कुछ शवों का पोस्टमार्टम करने के बाद पाया गया है कि उनमें आंखें नहीं हैं। कुछ मामलों में मान लिया गया कि चूहों या नेवलों ने शव को कुतर लिया गया होगा।
उस समय पोस्टमार्टम हाउस पर इतना निर्माण नहीं था और न शवों को रखने की उचित व्यवस्था ही थी। जब लगातार ऐसे मामले सामने आए तो बड़े कांड का खुलासा हुआ। इसमें नेत्र चिकित्सालय में आंखों को निकाल कर देने की बात कही गई। मानव उपकार के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी कहते हैं कि इस मामले में एक युवक चंद्रपाल की भूमिका सामने आई। जांच के बाद उसे जेल भी भेजा गया था।
यह मामला अभी अदालत में चल रहा है। एक और बड़ी घटना सन 2009 में सामने आई। गर्मियों में पोस्टमार्टम हाउस के बगल में मौजूद पोखर का पानी सूख गया। यहां पर हजारों की संख्या में नरमुंड मिले। तत्कालीन एसएसपी असीम अरुण द्वारा कराई गई जांच में पता चला कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार को पुलिस को मिलने वाले पैसे बचाने के लिए उन्हें इसी पोखर में फेंककर ठिकाने लगा दिया जाता था।
इसके अलावा बीच-बीच में किसी शव के चूहे, नेवले आदि के कुतर जाने की घटनाएं भी सामने आती रहीं। कुछ दिन पहले ही एक महिला के शव की सील खुली होने की घटना भी सामने आई थी।
भ्रष्टाचार के लगते रहे आरोप
पोस्टमार्टम हाउस के गेट पर लिखा है कि लोगों का प्रवेश निषेध है, लेकिन जानवरों के लिए कोई रोक टोक नहीं है। यही कारण है कि कभी कुत्ता शव को खाता है तो कभी नेवला। इसके अलावा पोस्टमार्टम हाउस के साथ सामाजिक संस्थाओं के समन्वय को बनाए रखने के लिए होने वाली बैठक भी तीन साल से नहीं हुई है। भ्रष्टाचार के आरोप भी समय-समय पर लगते रहे हैं। शवों में सिलाई ठीक से करने और जल्दी पोस्टमार्टम करने के लिए समय समय पर पैसे मांगने के आरोप भी लगते रहे हैं।